विश्वविद्यालयों को रिसर्च के लिए नहीं मिलेंगे 50 करोड़: RUSA

रूसा से ग्रांट के लिए चाहिए होते हैं 3.51 अंक सबसे ज्यादा 3.09 अंक मिले इंदौर विवि को

एजुकेशन डेस्क, भोपाल।  नैक ग्रेडिंग में पिछड़ने की वजह से प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) से रिसर्च के लिए 50 करोड़ रुपए की राशि नहीं मिलेगी। रूसा केवल उन्हीं विश्वविद्यालयों को राशि दे रहा है, जो ग्रेड-1 और 2 में स्थान हासिल कर पाए हैं और मप्र एक भी विवि उन पैमानों पर खरा नहीं उतरा है। इसका नतीजा यह भी होगा कि कॉलेज को अपग्रेड कर विवि नहीं बनाया जा सकेगा। हाल में रूसा ने इसके लिए गाइडलाइन जारी की है। रूसा को देश के अधिकतम 20 राज्यों को रिसर्च वर्क के लिए 50 करोड़ रुपए की राशि देना है। अब मप्र के विश्वविद्यालयों को उच्च शिक्षा विभाग से मिलने वाली राशि से ही काम चलाना होगा। 

उच्च शिक्षा विभाग ने की गुजारिश

- रिसर्च के लिए ग्रांट नहीं मिलने की वजह से अब उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी रूसा से गुजारिश कर रहे हैं कि नियमों में थोड़ी नरमी बरती जाए ताकि विवि को यह राशि उपलब्ध हो सके।
- मप्र के केवल विक्रम विवि, उज्जैन और महात्मा गांधी विवि, चित्रकूट को इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 20-20 कराेड़ रुपए की ग्रांट मिल सकती है।
- इसमें से भी बीयू बाहर हो गया है। इसकी मुख्य वजह है कि यह राशि भी केवल उन्हीं विश्वविद्यालयों को मिलेगी जिन्हें नैक की ग्रेडिंग में 2.5 से अधिक अंक मिले हैं, लेकिन बीयू को केवल 2.5 अंक ही मिले हैं, इसलिए रिसर्च की ग्रांट के साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर की ग्रांट के लिए भी वह पात्र नहीं है। 

ग्रांट के लिए 3.51 अंक जरुरी

- रूसा रिसर्च ग्रांट उन्हीं विश्वविद्यालयों को देता है, जिनके अंक 3.51 या इससे अधिक हों, लेकिन प्रदेश के किसी विवि के इतने अंक नहीं हैं।
- ए ग्रेड में होने के बावजूद अंकों की कमी की वजह से प्रदेश के विवि इसके पात्र नहीं हैं। सबसे ज्यादा अंक 3.09 देवी अहिल्या विवि, इंदौर के हैं।
- रूसा के अधिकारियों के मुताबिक रिसर्च के लिए कोई विवि पात्र नहीं है लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए दो विवि को राशि मिल जाएगी। 

पैसे ले लिए पर कॉलेज नहीं खोला

- रूसा से तकनीकी शिक्षा विभाग ने धार में इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने के लिए 50 फीसदी यानी करीब 14 करोड़ रुपए लिए थे।
- रूसा के अधिकारियों के मुताबिक इस दिशा में कई बार पत्राचार भी किया जा चुका है, लेकिन अब तक कॉलेज शुरू होना तो दूर बिल्डिंग ही नहीं बनी है।
- रूसा के अधिकारियों के मुताबिक हमने मार्च 2015 में तकनीकी शिक्षा विभाग को राशि दी थी। 
- यह सही है कि हमें धार में रूसा की ओर से इंजीनयिरिंग कॉलेज खोलने के लिए राशि मिली थी। यह विभाग के खाते में है और लैप्स नहीं हुई है। वित्त की बैठक में इस पर जल्द ही कोई निर्णय लेंगे और काम शुरू करेंगे। - वीरेंद्र कुमार, संचालक, तकनीकी शिक्षा विभाग 


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