UPSC टॉपर गरिमा तिवारी ने शेयर किए सक्सेस मंत्रा, सीखें इन 10 खास बातों से

सिविल सेवा परीक्षा— 2014 में सिलेक्ट हुईं गरिमा का मानना है कि उत्तर शब्द-सीमा के अंदर और टू द पॉइंट होना चाहिए, कोशिश की जाए कि सतही बातें न लिखी जाएं। 

करियर डेस्क ।  संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा- 2014 में चयनित गरिमा तिवारी ने आईआईटी मुंबई से केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है। इन्हें गाने सुनना और घूमना पसंद है। एक इंटरव्यू के दौरान गरिमा ने अपनी तैयारी से जुड़ी 10 खास बातें बताईं। जानते हैं इनके बारे में...

1. मेरा वैकल्पिक विषय हिन्दी साहित्य था; स्नातक स्तर पर और उसके बाद विषय से बिल्कुल जुड़ाव नहीं रहा। इसीलिये शुरुआत में लोक-प्रशासन को लेकर परीक्षा में बैठने का निर्णय भी लिया था। 

2. मैंने वैकल्पिक विषय के चुनाव का आधार लोकप्रियता को तो नहीं बनाया था; मेरे सामने समय की चुनौती भी थी। इतना ज़रूर कहा जा सकता है कि विषय में रुचि होनी चाहिये और उसके बाद अंकदायी, आसान या छोटे आकार जैसे कारणों को आधार बनाया जा सकता है।

3. सामान्य अध्ययन में मेरी कमज़ोरी करेंट अफेयर्स रही। इंटरनेट से पढ़ने में मैं बहुत सहज नहीं थी। इसलिए मेरी प्राथमिकता पहले परंपरागत विषयों की ठीक से तैयारी की रही, इसके बाद dynamic topics पर ध्यान दिया। कठिन विषयों को बार-बार रिवाइज़ किया और आसान को परिभाषित करके उन्हें भी सुधारने की कोशिश की।

4. निबंध के लिए अभ्यास ही एकमात्र विकल्प है। कुछ अच्छे निबंधों को पढ़ना सहायक हो सकता है। परीक्षा भवन में विषय के चयन और निबंध का मूल ढांचा बनाने में समय लेकर निबंध में सुधार किया। निष्कर्ष में कविता का प्रयोग और भूमिका किसी कहानी से शुरू करना मेरे लिये लाभदायक रहा।

5. उत्तर लेखन-शैली सफलता के लिए मुख्य सूत्र है। उत्तर शब्द-सीमा के अंदर और टू द पॉइंट होना चाहिये, कोशिश की जाए कि सतही अभिव्यक्तियाँ न हों। लेखन-शैली के विकास के लिये समय-सीमा में रहकर अभ्यास से मुझे काफी मदद मिली।

6. मैंने क्लास-नोट्स और अतिरिक्त प्राप्त प्रिंटेड नोट्स को ही अपने नोट्स मानकर तैयारी की, इसलिए दुविधा अधिक नहीं हुई। 

7. मॉक टेस्ट सीरीज़ परीक्षा के पहले परीक्षा का अनुभव करने का अच्छा माध्यम तो है ही, इसके अतिरिक्त स्व-मूल्यांकन और सुधार के लिये प्रेरणा भी मॉक टेस्ट सीरीज़ से ही मिलती है। 

8. साक्षात्कार की प्रक्रिया का अनुभव कुछ ऐसा रहा है कि मैंने जितनी तैयारी की थी, उसका 20% के आस-पास ही काम आया। साक्षात्कार के लिये आत्म-विश्वास और पृष्ठभूमि इत्यादि पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है।

9. मैंने तैयारी ग्रेजुएशन के बाद दो साल नौकरी करने के पश्चात् शुरू की थी, लेकिन कॉलेज के समय ही लक्ष्य स्पष्ट हो तो तैयारी का सबसे उपयुक्त समय वही होगा। जहाँ तक मेरी रणनीति की बात है तो जैसे ही मुझे सिविल सर्विसेज़ की तरफ रुझान महसूस हुआ मैंने बिना विलंब तैयारी शुरू कर दी।

10. सफलता के प्रति खुद की तरफ से आशावान तो मैं पहले प्रयास में ही थी, लेकिन कुछ तो नियति के हाथ में भी होता है। हालाँकि यह सही है कि सही दिशा में, सही मार्गदर्शन के साथ पढ़ाई की जाए तो एक-डेढ़ वर्ष की तैयारी पर्याप्त है। 

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