समय प्रबंधन मेरी रणनीति का मुख्य पहलू था : मो. अतहर आमिर

सिविल सेवा परीक्षा-2015 के टॉपर मो. अतहर आमिर का कहना है कि स्टूडेंट्स टाइम मैनेजमेंट को लेकर बेहतर रणनीति बनाएं और समय-समय पर रिवीज़न और टेस्ट भी दें। 

एजुकेशन डेस्क। सिविल सेवा परीक्षा-2015 में द्वितीय स्थान पर चयनित मो. अतहर आमिर ने साइंस बैकग्राउंड से होने के बावजूद मानविकी विषय के साथ सिविल सेवा परीक्षा में द्वितीय स्थान हासिल किया। मूलतः ज़म्मू-कश्मीर के रहने वाले आमिर स्वभाव से जितने मृदुभाषी और शालीन नज़र आते हैं उनके इरादे उतने ही मज़बूत हैं। इन्हीं की बदौलत मात्र 23 वर्ष की उम्र में देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में द्वितीय स्थान हासिल किया। बातचीत के दौरान तहर ने अपनी तैयारी से लेकर सफलता तक के तमाम अनुभव साझा किए। जानते हैं इनके बारे में... 

सवाल: क्या यह आपका पहला प्रयास था? 
जवाब: मैंने अपनी पिछली तैयारी का विश्लेषण किया ताकि मैं ये जान सकूं कि पिछली बार कहां कमी रह गई थी जिसकी वज़ह से मेरे कम अंक आए, और किन क्षेत्रों पर मुझे ज़्यादा ध्यान देना चाहिए। इसलिये इस बार मेरी रणनीति का मुख्य फोकस उन सारी कमियों को ठीक करना था। हालांकि, दोनों ही बार समय प्रबंधन मेरी रणनीति का मुख्य पहलू था।

सवाल: दूसरी परीक्षाओं से यूपीएससी किस तरह अलग है?
जवाब: मुझे लगता है कि यूपीएससी ज़्यादा समग्र प्रकृति की परीक्षा है। इसका दायरा काफी व्यापक है, इसमें किसी व्यक्ति की बहुआयामी परीक्षा होती है। इसलिए, यूपीएससी परीक्षा न सिर्फ आपकी जानकारी की, बल्कि आपके एटीट्यूड और नज़रिये की भी परीक्षा है।

सवाल: आपकी सफलता का सूत्र क्या है?
जवाब: कठिन परिश्रम, निरंतरता और योजनाबद्ध तरीके से काम करना मेरी रणनीति के अभिन्न अंग रहे हैं। कठिन परिश्रम के अलावा सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं।

सवाल: अपनी क्षमता और मेहनत के अलावा सफलता का श्रेय किसे देना चाहेंगे?
जवाब: मैं अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार-माता-पिता, दादा-दादी, अपने शिक्षकों, दोस्तों और उन सभी लोगों को देना चाहूंगा जो हर मुश्किल घड़ी में मेरे साथ जुड़े रहे। खासतौर से मेरे दादाजी मेरे लिए बहुत बड़ी प्रेरणा रहे हैं, इसलिये उन्हें विशेष रूप से धन्यवाद।

सवाल: जिस तरह प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों में सामान्य अध्ययन का पाठ्यक्रम काफी विस्तृत होता है, इसके लिये आपने क्या रणनीति अपनाई?
जवाब:
मैंने प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा की अपनी तैयारी में कोई विशेष अंतर नहीं किया। हालांकि ज़ब प्रारंभिक परीक्षा नज़दीक आ रही थी तो मैंने ज़्यादा-से-ज़्यादा प्रश्नों को हल करने और चीज़ों को दोहराने पर ध्यान दिया।

सवाल: क्या आपने किसी विशेष खंड पर ज़्यादा ज़ोर दिया या सभी खंडों को एकसमान महत्त्व दिया? आपके विचार से, क्या कुछ खंडों को छोड़ा भी जा सकता है?

जवाब: एक बात जिसे लेकर मेरा मत एकदम स्पष्ट था- अपनी तैयारी में मैंने एक भी चीज़ नहीं छोड़ी। हां, कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जिनसे आज़कल ज़्यादा प्रश्न पूछे जा रहे हैं, जैसे कला एवं संस्कृति, पर्यावरण और पारिस्थितिकी, करेंट अफेयर्स इत्यादि, इन पर मैंने ज़्यादा ध्यान दिया; दूसरा ये कि टेस्ट के दौरान जिन क्षेत्रों में मैं खुद को कमज़ोर पाता था और जिनकी मुझे ज़्यादा तैयारी करनी थी, ऐसे क्षेत्रों पर मैंने ज़्यादा ध्यान दिया।

सवाल: परीक्षा के तीनों चरणों की तैयारी के लिये आपने कितना समय दिया?
जवाब:
एक साल में, औसतन 8 से 10 घंटे रोज़ाना।

सवाल: आपको क्या लगता है, पढ़ाई के साथ नोट्स बनाना कितना ज़रूरी है?
जवाब:
नोट्स बहुत ही महत्त्वपूर्ण और मददगार होते हैं। वे हमें चीज़ों का रिवीज़न करने में मदद करते हैं। मुझे लगता है कि अगर हम अखबार पढ़ते समय ही, विशेषकर करेंट अफेयर्स के नोट्स बनाते जाएं, तो उनसे हमें बहुत मदद मिलती है। इसलिये, मेरा यही सुझाव है कि नोट्स बनाते समय ही विभिन्न खण्डों को अलग-अलग रखें और किसी एक खंड से संबंधित बातें उसी के नोट्स में हों ताकि ज़ब आप कोई टॉपिक पढ़ना चाहें, तो उससे संबंधित सारी बातें आपको एक ही ज़गह मिल जाएं। 

सवाल: कुछ वेबसाइट्स के नाम बताएं जिनका आप उपयोग करते थे?
जवाब:
मैं insightsonindia जैसे ब्लॉग और PIB, IUCN, UNDP की वेबसाइट्स को फॉलो करता हूं। 

सवाल: आपके विचार से, प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा दोनों के लिये टेस्ट सीरीज़ कितनी ज़रूरी है? कृपया अपने अनुभव के आधार पर बताएं।
जवाब:
सामान्य अध्ययन और वैकल्पिक विषय की तैयारी के लिये मैंने 20-21 मॉक टेस्ट दिये थे।

सवाल: आपने समय प्रबंधन की चुनौती का सामना कैसे किया?
जवाब:
एक समय-सारणी का होना बहुत ज़रूरी है लेकिन समय-सारणी व्यावहारिक होनी चाहिये। ऐसे लक्ष्य बनाएं जो साधे जा सकें। मैं साप्ताहिक और मासिक लक्ष्य तय करता था। साथ ही, समय-सारणी में मैं टेस्ट और रिवीज़न के लिये समय भी रखता था।

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