जो कुछ भी पढ़ें उसका सार लिखें और बार—बार रिवीजन करते रहें: जसमीत

सिविल सेवा परीक्षा-2015 में जसमीत सामान्य अध्ययन में सर्वाधिक अंक हासिल करने वाले परीक्षार्थियों में से एक हैं। सामान्य अध्ययन में उन्होंने 440 अंक हासिल किए हैं। 

एजुकेशन डेस्क। सिविल सेवा परीक्षा-2015 में तीसरा स्थान पाने वाले जसमीत सिंह संधू ने दृढ़ निश्चय और लगन की एक नई मिसाल पेश की है। मूलतः पंजाब के रहने वाले जसमीत ने इससे पहले सिविल सेवा परीक्षा-2014 में 332वीं रैंक हासिल की थी। 2013 की पंजाब पीसीएस परीक्षा में जसमीत ने छठा स्थान हासिल किया था। एक बातचीत के दौरान जसमीत ने अपनी तैयारी से लेकर सफलता तक के तमाम अनुभव साझा किए हैं। जानते हैं इनके बारे में...

सवाल: क्या यह आपका पहला प्रयास था? 
जवाब:
जसमीतः नहीं, यह मेरा चौथा प्रयास था। इस बार मैंने एक सुनिश्चित रणनीति के साथ प्रश्न के विभिन्न आयामों को कवर करते हुए एकदम सरल भाषा में उत्तर लिखे।

सवाल : यूपीएससी की परीक्षा अन्य परीक्षाओं से कैसे अलग है?
जवाब:
यूपीएससी परीक्षा अन्य परीक्षाओं से इस मायने में अलग है कि यह आपके धैर्य, मानसिक एवं शारीरिक क्षमता को एक भिन्न स्तर पर जांचती है।

सवाल: आपकी सफलता का सूत्र क्या है?
जवाब:
मुझे लगता है कि उत्तर लेखन शैली की सरलता और बहुआयामी दृष्टिकोण ही मेरी सफलता का मूल मंत्र है।

सवाल: आपने तैयारी कब शुरू की- स्नातक के साथ ही या उसके तुरंत बाद?
जवाब:
मैंने अपनी तैयारी स्नातक के बाद शुरू की।

सवाल: अपनी क्षमता और मेहनत के अलावा आप अपनी सफलता का श्रेय किसे देना चाहेंगे?
जवाब:
मैं अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, भाई तेजबीर, अपने मित्र अमन, निशांत, वात्सल्य और मुकुल पाठक सर को देना चाहूंगा।

सवाल: जिस तरह प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों में सामान्य अध्ययन का पाठ्यक्रम काफी विस्तृत होता है, इसे देखते हुए आपने क्या रणनीति अपनाई?
जवाब:
मैंने सभी खंड तैयार किये। साथ ही, मैं सभी खंडों पर शॉर्ट नोट्स बनाता था और उनका बार-बार रिवीज़न करता था।

सवाल: क्या आपने किसी विशेष खंड पर ज्य़ादा ज़ोर दिया या सभी खंडों को एकसमान महत्त्व दिया? आपके विचार से, क्या कुछ खंडों को छोड़ा भी जा सकता है?
जवाब: मैंने सभी खंडों पर बराबर ज़ोर दिया। मैं सभी अभ्यर्थियों से भी यही अनुरोध करूंगा कि किसी भी खंड को न छोड़ें।

सवाल: आपने परीक्षा के तीनों चरणों की तैयारी उनके निर्धारित क्रम के अनुसार की या फिर एक-साथ?
जवाब:
मैंने प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा की तैयारी एक-साथ की। चूंकि मुझे पिछले 3 प्रयासों का अनुभव भी था, साथ ही इस दौरान मैंने सभी खंडों की तैयारी भी कर ली थी, इसलिये इस बार समय की कोई समस्या नहीं थी।

सवाल: आपके अनुसार, पढ़ाई के साथ नोट्स बनाना कितना ज़रूरी है? 
जवाब:
नोट्स बनाना आपकी ‘आदत’(Habit) और ‘कला’(Art) दोनों होनी चाहिए। आप जो कुछ भी पढ़ें, वो आपको समझ आना चाहिये, आपको उसका सार लिखना चाहिये और बार-बार रिवीज़न भी करना चाहिये।

सवाल: क्या आपने अपनी तैयारी के लिए इंटरनेट तथा सोशल नेटवर्किंग साइट्स की मदद ली? 
जवाब:
मैं insightsonindia के Secure Compilations, Daily Current Affairs; IAS baba और mrunal की ऑनलाइन पाठ्य-सामग्री का नियमित पाठक रहा हूं। ये वेबसाइट्स मेरी करंट अफेयर्स की तैयारी में मददगार रहीं। मैं ऐसी पत्रिकाओं को छोड़ देता था क्योंकि वे मुझे भारी-भरकम लगती थीं। लेकिन ‘योजना जिस्ट’ और ‘पीआईबी जिस्ट’ को मैंने IASbaba की वेबसाइट से तैयार किया।

सवाल: आपने समय प्रबंधन की चुनौती का सामना कैसे किया?
जवाब:
यह मेरा चौथा प्रयास था, इसलिए मेरे पास समय की कोई कमी नहीं थी। फिर भी सिविल सेवा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को मैं यही सलाह दूंगा कि वे जो कुछ भी पढ़ते हैं उससे ज्य़ादा-से-ज्य़ादा सीखने की कोशिश करें तथा उन्होंने जो नहीं पढ़ा है उसे लेकर परेशान न हों।

सवाल: आपने प्रतिदिन औसतन कितने घंटे पढ़ाई की? जब आप पढ़ाई नहीं करते थे तो उस समय और क्या करते थे?
जवाब:
मैंने कभी पढ़ाई के घंटों पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि मैंने हमेशा इस बात पर ध्यान दिया कि इन घंटों में मेरी पढ़ाई की गुणवत्ता क्या रही। खाली समय में मैं फुटबॉल खेलता था या Quora पर ब्लॉग लिखता था।

सवाल: क्या आपको लगता है कि ग्रुप स्टडी से मदद मिलती है? 
जवाब:
ग्रुप स्टडी का फायदा तभी मिलता है जब ग्रुप के सभी सदस्य प्रतिबद्ध हों। मेरे कुछ बहुत अच्छे मित्र थे जिनके साथ मैं विभिन्न विषयों पर चर्चा करता था।

सवाल: आपका वैकल्पिक विषय क्या था?
जवाब:
मेरा वैकल्पिक विषय पंजाबी भाषा साहित्य था। हालांकि मैंने इसे अपने स्नातक के दौरान नहीं पढ़ा था। यह मेरे भाई की राय थी कि मैं पंजाबी साहित्य को अपने वैकल्पिक विषय के तौर पर सिलेक्ट करूं।। इससे पहले लोक प्रशासन तथा मनोविज्ञान मेरे वैकल्पिक विषय थे लेकिन मैं उन विषयों को ठीक से समझ नहीं पाया। वैसे, दोनों विषय अच्छे हैं और उनसे टॉपर भी निकले हैं लेकिन मैं इनमें अच्छे अंक प्राप्त नहीं कर सका। इसलिये फिर मैंने पंजाबी साहित्य चुना। मैं विद्यार्थियों को उनकी रुचि के आधार पर विषय चुनने की सलाह दूंगा न कि उनमें मिलने वाले अंकों के आधार पर।

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