कामयाबी सबको नहीं मिलती, अगर मिली है तो उसका सम्मान करें: साइना

टैलेंट सब में नहीं होता, लेकिन कई बार कड़ी मेहनत करके टैलेंट को विकसित किया जा सकता है।

FIRST PERSON : ओलिम्पिक में मेडल जीतना मेरा सपना था, लेकिन अपने इस सपने को पूरा करने के लिए मैंने बचपन में वे सब चीजें खोईं जो एक आम बच्चे के हिस्से में आती हैं। अपनी आज की उपलब्धियों के लिए मैंने 9 साल की उम्र से मैदान में पसीना बहाना शुरू कर दिया था। मुझे लगता है कि इस प्रक्रिया में दूसरे बच्चों की तरह मैं अपने पेरेंट्स के साथ समय नहीं बिता पाई और न ही बचपन की खुशियों का आनंद उठा पाई। हालांकि मुझे यह भी लगता है कि बहुत से लोग मेरी ही तरह अपने सपनों को पूरा करने के लिए यह सब करते हैं, लेकिन सच यह भी है कि सफलता हर किसी के हिस्से में नहीं आती। इसलिए मुझे लगता है कि मैं लकी हूं कि जो मुझे जो चाहिए था वह मुझे मिला। 

बेस्ट के लिए मैदान में उतरिए 

मैं हर मैच जीतने के लिए खेलती आई हूं। जब मैंने बैडमिंटन में अपना कॅरिअर शुरू किया तो मैंने सोचना बंद कर दिया कि चाइना या इंडोनेशिया बेहतर है। मैं हमेशा मैदान में यह सोचकर खेलती थी कि साइना सबसे बेहतर है। जब आप जीतने के लिए खेलते हैं तो कोर्ट में आपकी परफॉर्मेंस को देखकर आपका विपक्ष कमजोर पड़ जाता है, इसलिए हमेशा बेस्ट देने यानी जीतने के लिए मैदान में उतरें। 

सही गाइडेंस सक्सेस को आसान बनाता है 

मैंने अपने अब तक के कॅरिअर में यह महसूस किया है कि मुझसे ज्यादा मेरे मेंटर पर प्रेशर होता है। कई बार मैच से पहले अगर मैं तनाव में होती हूं तो मेरे इस दबाव को दूर करने और मोटिवेट करने की जिम्मेदारी मेरे मेंटर की होती है। मुझे अब तक अच्छे मेंटर मिले हैं जिन्होंने मुझे मोटिवेट किया। कोर्ट में खेलते हुए परफॉर्मेंस के दबाव को वे अपने माटिवेशन से तुरंत कम कर देते हैं। अपने अनुभव से कह सकती हूं कि एक अच्छा मेंटर और सही गाइडेंस सफलता को आसान बना देते हैं। 

सब कुछ पहले से तय नहीं होता 

अक्सर जो चीजें आप प्लान करते हैं वे हुबहू नहीं होतीं। ऐसा सबके साथ होता है। बचपन में घर से स्कूल और स्कूल से घर लौटने वाले रूटीन से मुझे बोरियत होती थी। इसके बाद पापा के कहने पर कराटे कोचिंग जॉइन की। यह बदलाव मुझे अच्छा लगा। यहां मेहनत के जरिए ब्राउन बेल्ट अपने नाम किया। इसके बाद कराटे के कुछ स्टेप्स से मुझे परेशानी हुई और मैंने गेम बदलने का फैसला लिया। चूंकि मेरे पेरेंट्स अच्छे बैडमिंटन खिलाड़ी थे तो उन्होंने मुझे इस खेल के लिए प्रेरित किया। इस तरह मैंने बैडमिंटन खेलना शुरू किया और उसमें कई पड़ाव तय किए। यह भी सच है कि टैलेंट सब में नहीं होता, लेकिन कई बार कड़ी मेहनत करके टैलेंट को विकसित किया जा सकता है।
 

कौन हैं साइना नेहवाल?

- साइना का जन्म 17 मार्च 1990 को हिसार, हरियाणा के एक जाट परिवार मे हुआ था।
- ओलंपिक खेलों में महिला एकल बैडमिंटन का ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली वे देश की पहली महिला खिलाड़ी हैं।
- उन्‍होंने 2006 में एशि‍याई सैटेलाइट प्रतियोगिता भी जीती है।
- अप्रैल 2015 में आधिकारिक रूप से उनकी विश्व रैंकिंग 1 घोषित की गई। इस मुकाम तक पहुंचने वाली वे प्रथम भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी हैं।
- 2006 में, सायना अंडर 19 राष्ट्रीय चैंपियन बनी।
- 2018 में सायना नेहवाल ने 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में महिला एकल वर्ग का स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
- साइना नेहवाल विश्व की 10 वें नंबर की खिलाडी हैं।

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