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चिकनपॉक्स जैसी बीमारी कर देती है स्टूडेंट्स का साल खराब

स्टूडेंट्स को एग्जाम से वंचित कर कॉपी भी जला देते हैं

एजुकेशन डेस्क, जयपुर। एक उदाहरण- राजस्थान विश्वविद्यालय में बीएससी द्वितीय वर्ष का स्टूडेंट रामवीर 7 मई को तपती दोपहरी में 3 बजे अग्रवाल कॉलेज में एग्जाम सेंटर पहुंचा। एग्जाम शुरू हुआ ही था कि रामवीर से कॉपी और प्रश्न पत्र दोनों छीन लिए। वीक्षक ने कहा - तुम्हें चिकनपॉक्स है इसलिए एग्जाम नहीं दे सकते। घर जाओ। रामवीर ने अलग बैठकर एग्जाम देने को कहा, लेकिन उसे बाहर निकाल दिया। यह पेपर उसे अगले साल देना होगा। 

कॉपी जला देते हैं
राजस्थान विश्वविद्यालय में हर साल रामवीर जैसे दर्जनों स्टूडेंट्स को चिकनपॉक्स के कारण एग्जाम से वंचित कर दिया जाता है। बात यहीं खत्म नहीं होती, अगर किसी स्टूडेंट ने एग्जाम दे भी दिया तो उसकी कॉपी को जला दिया जाता है। विश्वविद्यालय में पिछले कई साल से यह भेदभाव की एग्जाम चल रहे है। हालांकि, राजस्थान के ही अन्य विश्वविद्यालयों और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में इस बीमारी से पीड़ित स्टूडेंट्स को अलग बिठाकर एग्जाम लिया जाता है। राजस्थान विश्वविद्यालय में इस साल 30 से ज्यादा स्टूडेंट्स को चिकनपॉक्स के कारण परीक्षा से वंचित कर दिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से सभी एग्जाम सुप्रींटेंडेंट को निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी स्टूडेंट्स को स्मॉल पॉक्स, चिकनपॉक्स, इनफ्लुएंजा जैसी संक्रामक बीमारी हो तो उसे एग्जाम में नहीं बैठने दिया जाए। इसमें यह भी हवाला दिया गया है कि एग्जाम के दौरान भी मालूम होने पर तुरंत उसकी उत्तर पुस्तिका को डिस्ट्रॉय (उत्तर पुस्तिका को जला दिया जाए) कर दिया जाए। चिकित्सकों की मानें तो मौजूदा समय में चिकनपॉक्स जैसी बीमारी के संक्रमण से फैलने की संभावना बहुत कम है। परीक्षार्थी को आईसोलेट रूम में बिठाकर ग्लब्स का उपयोग कर एग्जाम ली जा सकती है। 

एक्ट में है प्रावधान : विवि प्रशासन का कहना है कि विश्वविद्यालय एक्ट के प्रावधान के अनुसार ही ऐसी संक्रामक बीमारियों से ग्रसित स्टूडेंट्स एग्जाम में नहीं बैठने दिया जाता है। इसमें यह भी प्रावधान है कि परीक्षा के दौरान भी किसी स्टूडेंट को चिकनपॉक्स या इनफ्लुएंजा जैसी बीमारी की जानकारी मिल जाए तो उसे परीक्षा कक्ष से बाहर कर उत्तर पुस्तिका को डिस्ट्रॉय कर दिया जाता है। 

 

50 साल पुराने नियम से एक्सपर्ट कहते हैं...अलग से ले सकते हैं एग्जाम लेते भी हैं 

- स्टूडेंट्स को एग्जाम देने से नहीं रोका जा सकता है। सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट को चिकनपॉक्स होने की स्थिति में अलग से बैठा कर उसकी एग्जाम लिया जात है, बोर्ड का यह नियम है। - आशा गुप्ता (प्रिंसिपल एवं कॉर्डिनेटर, समान परीक्षा योजना जिला जयपुर) 
- स्टूडेंट्स को चिकनपॉक्स है तो उसे अलग से रूम में बैठा कर एग्जाम ली जाती है। एमपीयूटी में पहले ऐसा मामला आया था तो अलग से व्यवस्था कर एग्जाम आयोजित की गई थी। - डा. जीपी शर्मा (परीक्षा नियंत्रक, एमपीयूटी उदयपुर) 

हर साल एक दर्जन स्टूडेंट्स पर विवि. के 50 साल पुराने नियमों की मार। सत्र 2018-19 की मुख्य परीक्षा से 40 स्टूडेंट्स को बाहर कर दिया गया है 

- चिकनपॉक्स संक्रामक जरूर है लेकिन इतनी भयावह नहीं है कि स्टूडेंट का साल बर्बाद कर दिया जाए। चिकनपॉक्स पीड़ित को अलग आइसोलेट रूम मे बिठाकर परीक्षा ले सकते हैं। डाॅ. यूएस अग्रवाल, प्रिंसिपल एसएमएस मेडिकल कॉलेज 
- चिकनपॉक्स की इनेक्टिविटी दो दिन पहले और दो दिन बाद तक होती है। एंटी वायरस मेडिसिन उपलब्ध हैं। चिकनपॉक्स पीड़ित विद्यार्थी की परीक्षा अलग से ले सकते हैं। - डा. दीपक माथुर, (वरिष्ठ आचार्य चर्म रोग, एसएमएस अस्पताल) 

तो सालभर बाद सुधारते हैं गलती 
- विश्वविद्यालय प्रशासन को इस बात से कोई मलाल नहीं है कि उनके इस कदम से छात्रों का एक वर्ष बर्बाद हो रहा है। प्रशासन का तर्क है कि मेडिकल सर्टिफिकेट देने के बाद ऐसे स्टूडेंट को अगले एग्जाम (एक साल बाद) में उपस्थित होने का मौका दिया जाता है।
- मेडिकल सर्टिफिकेट देने के बाद उससे दुबारा शुल्क नहीं लिया जाता। वर्षों से चली आ रही इस प्रक्रिया के पीछे यह भी तर्क दिया जा रहा है कि चिकनपॉक्स या इनफ्लुएंजा दूसरे स्टूडेंट्स में नहीं फैले इसलिए उन्हें एग्जाम में नहीं बैठने दिया जाता। 


 

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