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RTE: एडमिशन प्रोसेस पेचीदा, स्टूडेंट्स-पैरेंट्स हो रहे परेशान

4 साल में 142 स्कूल बढ़े, छात्रों की संख्या घटी, नियम और ऑनलाइन फॉर्म के चलते 1563 घट गए एडमिशन

एजुकेशन डेस्क, कोटा । आरटीई (राइट टू एजुकेशन) के तहत प्राइवेट स्कूलों की संख्या भले बढ़ गई है, लेकिन स्कूलों में इन बच्चों के नामांकन में इजाफा नहीं हुआ है। वर्ष 2013-14 में प्रारंभिक शिक्षा में प्राइवेट स्कूलों की संख्या 945 थी, यह बढ़कर वर्ष 2016-17 में 1087 तक पहुंच चुकी है। वहीं, इन स्कूलों में आरटीई के तहत होने वाले एडमिशन की संख्या में कमी आई है। 2013-14 में इन स्कूलों में बच्चों का नामांकन 4046 था, जो घटकर 2483 रह गया है। यानी करीब 40 प्रतिशत एडमिशन की संख्या में कमी आई है। अभिभावकों का कहना है कि पिछले 2 साल से आरटीई के नियमों में पेचीदगी और ऑनलाइन एडमिशन प्रोसेस के कारण एडमिशन में परेशानियां हुई हैं। ऑनलाइन फॉर्म सबमिट करने के बाद फॉर्म में वार्ड से लेकर मूल निवास और अन्य मिस्टेक होने के कारण इसमें एडमिशन नहीं होता है। इससे अभिभावक परेशान होते रहते हैं। 


आरटीई के तहत प्राइवेट स्कूलों में पिछले 4 साल में एडमिशन की स्थिति 

सत्र

प्ले ग्रुप छात्र-संख्या

स्कूल

2013-14 1123 4046 945
2014-15 1712 4630 994
2015-16 1734 4079 1029
2016-17 916 2483 1087

 

इधर 3 करोड़ रु. बकाया है आरटीई का विभाग में 

प्राइवेट स्कूलों का आरटीई के तहत करीब तीन करोड़ रुपए बकाया चल रहा है। पिछले समय से माध्यमिक शिक्षा के 320 और प्रारंभिक शिक्षा के 50 स्कूलों को अभी तक आरटीई के तहत बकाया भुगतान नहीं मिला है। करीब तीन करोड़ रुपए मार्च महीने से बकाया है। 

 

आरटीई की प्रक्रिया में पिछले दो साल से ऑफलाइन की जगह ऑनलाइन करने के अलावा इनकम ढाई लाख रुपए से घटाकर एक लाख रुपए करने और फॉर्म में मिस्टेक आने के अलावा अन्य पेचीदगियां होने से एडमिशन की प्रक्रिया पर असर हुआ है। प्राइवेट स्कूलों की ओर से मार्च महीने से पुनर्भरण की मांग कर रहे हैं, लेकिन हमें अभी तक नहीं मिली है। - संजय विजयवर्गीय, कोषाध्यक्ष, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन 

विभाग की ओर से प्राइवेट स्कूलों के आरटीई के तहत बकाया भुगतान को लेकर बीकानेर निदेशालय को पत्र भिजवा दिया है। प्रयास है कि जल्द इन्हें पुनर्भरण की राशि मिले। - राजेश चंदेल, एडीईओ माध्यमिक 
 


सालाना इनकम की लिमिट घटाने से भी पड़ा असर 

प्राइवेट स्कूल संचालकों का कहना है कि पिछले दो साल में आरटीई एडमिशन की प्रोसेस में बदलाव होने से स्टूडेंट्स की संख्या में कमी हुई है। पहले अभिभावकों के लिए अधिकतम इनकम ढाई लाख थी, इसे घटाकर एक लाख रुपए कर दी है। वहीं, दूसरी ओर इसमें फॉर्म भरने में गलतियां होने यानी वार्ड नंबर, एड्रेस प्रूफ के कारण से भी बच्चों के एडमिशन की संख्या में कमी हुई है। इसके अलावा छोटे और आरटीई में शामिल प्राइवेट स्कूलों के सामान्य एडमिशन में भी कमी आई है। 

 

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