Railway Exam : एग्जाम की तैयारियों के दौरान ये 5 गलतियां करना पड़ सकता है आपको भारी

अब जबकि कई कैंडिडेट्स ने रेलवे परीक्षा की तैयारियां शुरू कर दी हैं, यहां यह जानना जरूरी है कि इस तरह की प्रीपरेशन के दौरान अक्सर किस तरह की गलतियां होती हैं। ताकि आप इन गलतियों को समझकर उन्हें दोहराने से बच सकें।

करियर डेस्क । रेलवे इतिहास की सबसे बड़ी एग्जाम आयोजित करने जा रहा है जिसमें 90 हजार पदों पर भर्ती की जाएगी। इनमें से करीब 63 हजार पद ग्रुप डी और शेष 27 हजार पद ग्रुप-सी यानी असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) और टेक्नीशियन के हैं। इस Railway Exam में भाग लेने के लिए करीब पौने तीन करोड़ कैंडिडेट्स ने अप्लाय किया है। अब जबकि कई कैंडिडेट्स ने रेलवे परीक्षा की तैयारियां शुरू कर दी हैं, यहां यह जानना जरूरी है कि इस तरह की प्रीपरेशन के दौरान अक्सर किस तरह की गलतियां होती हैं। ताकि आप इन गलतियों को समझकर उन्हें दोहराने से बच सकें।

प्लानिंग पूरी, एग्जीक्यूशन अधूरा
एग्जाम के लिए अप्लाय करने के बाद से ही कई कैंडिडेट्स इसकी प्लानिंग में जुट जाते हैं। प्लानिंग अच्छी बात है। लेकिन प्रॉब्लम तब होती है जब प्लानिंग तो कर लेते हैं, लेकिन इस पर एग्जीक्यूशन नहीं करते हैं। जैसे अगर रेलवे एग्जाम की ही बात करें तो आपने प्लानिंग तो कर ली कि आप रोजाना हर सब्जेक्ट को दो-दो घंटे देंगे, लेकिन फिर किसी एक सब्जेक्ट पर ही ज्यादा फोकस कर लिया।

 बहुत ज्यादा नोट्स कलेक्ट करना
जब भी कोई एग्जाम होती है तो पहले ही मार्केट में उससे संबंधित ढेर सारी बुक्स आ जाती हैं। ऑनलाइन भी बहुत सारा मेटर उपलब्ध रहता है। ऐसे में कई कैंडिडेट्स बहुत सारी बुक्स भी ले आते हैं और ऑनलाइन उपलब्ध सामग्री भी कलेक्ट कर लेते हैं। कई लोग कोचिंग क्लासेस से भी मटेरियल ले आते हैं। लेकिन इसका कोई फायदा नहीं होता, बल्कि इतनी सामग्री देखकर कन्फ्यूजन ही बढ़ता है।

मॉक टेस्ट पर फोकस ना करना
कई कैंडिडेट्स ऐसे होते हैं तो स्टडी तो खूब करते हैं, लेकिन मॉक टेस्ट पर ध्यान नहीं देते। जबकि मॉक टेस्ट इस तरह से बनाए जाते हैं कि उन्हें सॉल्व करने वाले को ऐसा एहसास हो कि वह रियल में एग्जाम ही दे रहा हो। इसलिए रियल एग्जाम का एक्सपीरियंस लेने के लिए अधिक से अधिक मॉक टेस्ट पर फोकस करना चाहिए।

कई एग्जाम पर एक साथ फोकस करना
यह भी एक कॉमन मिस्टेक है। अगर आप बेहतर रिजल्ट चाहते हैं तो आपको एक ही समय पर एक या दो एग्जाम पर ही फोकस करना चाहिए और वह भी सेम पैटर्न वाली। एग्जाम को जुआ नहीं मानते हुए केवल यही सोचें कि आप जो भी एग्जाम लिखने जा रहे हैं, उसमें आपको पास होना ही है। जब आप ऐसा सोच लेंगे तो फिर एक ही एग्जाम पर फोकस कर पाएंगे।

एक ही टॉपिक पर अटके रहना
कई कैंडिडेट पढ़ाई तो बहुत करते हैं, लेकिन इस दौरान वे काफी समय भी वेस्ट कर देते हैं। कई बार तो कैंडिडेट एक ही टॉपिक पर अटके रहते हैं। वे उस टॉपिक से संबंधित सारे कॉन्सेप्ट क्लियर करने की कोशिश करते हैं। लेकिन यहां ध्यान रखना है कि किसी भी टॉपिक के कॉन्सेप्ट क्लियर करने से ज्यादा जरूरी यह है कि आप उस टॉपिक से कितने नंबर ला पाते हों। अगर कोई टॉपिक बहुत ज्यादा समझ में नहीं आ रहा हो तो उसमें उलझने के बजाय बेहतर यह होगा कि उसे छोड़कर आगे बढ़ा जाए।
 

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