रेज्यूमे में इन गलतियों से बदल सकती है रिक्रूटर की सोच

रेज्यूमे में अगर आपने स्पेलिंग्स या ग्रामर में गलतियां की हैं तो रिक्रूटर समझता है कि आपने इसे जल्दबाजी में बनाया है। इससे आपकी एकाग्रता का अंदाजा लगाया जाता है।

करियर डेस्क ।  रेज्यूमे में इन गलतियों से बदल सकती है रिक्रूटर की सोच, सोशल मीडिया ने रिक्रूटमेंट को बदल कर रख दिया है, लेकिन रेज्यूमे की अहमियत अब भी बरकरार है। हालांकि सीमित पदों के लिए आने वाले ढेरों रेज्यूमे पर हायरिंग मैनजर्स कम समय (लगभग 30 सैकंड एक रेज्यूमे पर दे पाते हैं। अब इतने कम वक्त में अगर कोई भी गलती रिक्रूटर्स को नजर आती है तो वे कैंडिडेट को रिजेक्ट कर देते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप रेज्यूमे में इन गलतियों से बचने की कोशिश करें। 

खराब अंग्रेजी 

रेज्यूमे में अगर आपने स्पेलिंग्स या ग्रामर में गलतियां की हैं तो रिक्रूटर समझता है कि आपने इसे जल्दबाजी में बनाया है। इससे आपकी एकाग्रता का अंदाजा लगाया जाता है। जब भी रेज्यूमे बनाएं, खुद पढ़ें और दूसरों को भी एक बार पढ़ने को दें। इससे जो गलतियां छूटी हैं उनमें करेक्शन हो पाएगा।

फोटोग्राफ 

हर प्रोफाइल के लिए रेज्यूमे में फोटो लगाना जरूरी नहीं है। वैसे भी अब ज्यादातर रिक्रूटर्स कैंडिडेट्स को सोशल मीडिया पर चेक करते हैं। साथ ही अधिकांश कंपनियां स्किल्स, एजुकेशन और वर्क एक्सपीरियंस के आधार पर रिक्रूटमेंट करती हैं। इसलिए फोटो इतनी अहमियत नहीं रखती। 

सभी जॉब्स का जिक्र 

अक्सर प्रोफेशनल्स रेज्यूमे में अपनी सभी जॉब्स का उल्लेख कर देते हैं। जबकि करियर के शुरुआती दौर में कई जॉब ऐसे होते हैं जो मौजूदा प्रोफाइल से मेल नहीं खाते। ऐसे में रिक्रूटर आपका रेज्यूमे छोड़ उन रेज्यूमे की तलाश करता है जिनकी वर्क हिस्ट्री उनके मौजूदा प्रोफाइल से मेल खाती है। 

लंबा कंटेंट 

अगर आपका रेज्यूमे दो पेज से ज्यादा लंबा है तो रिक्रूटर उसे नहीं पढ़ेंगे क्योंकि एक पद के लिए कई कैंडिडेट्स अप्लाय करते हैं ऐसे में लंबे रेज्यूमे को समय दे पाना मुश्किल होता है। ऐसे में अगर आप काबिल भी हैं तो भी लंबा रेज्यूमे रिक्रूटर्स को कम पसंद आता है।

गलत तारीख

रेज्यूमे में किसी भी नौकरी की जॉइनिंग और रिलीविंग डेट्स सही होनी चाहिए। गलत तारीख होने पर लगता है कि आप अपने पिछले एम्प्लॉयमेंट के बारे में कुछ छिपाना चाहते हैं। जिससे हायरिंग मैनेजर आप पर संदेह करने लगता है। 

लंबी एजुकेशन टाइमलाइन

एजुकेशन टाइमलाइन को छोटा रखें। इसमें स्कूल के बाद यूजी, पीजी का जिक्र करें क्योंकि कई बार आपकी नौकरी का आधार मार्क्स नहीं स्किल्स होती हैं। हर सब्जेक्ट के मार्क्स अलग से लिखने की जरूरत नहीं है। 

अस्पष्ट लेआउट

कई बार रेज्यूमे को अलग दिखाने के लिए लेआउट पर नए प्रयोग किए जाते हैं, जबकि ऐसा सिर्फक्रिएटिव प्रोफाइल के लिए ही किया जाना चाहिए। ज्यादा प्रयोग करने से रिक्रूटर को आपका रेज्यूमे समझने में परेशानी होती है।

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