किताब पढ़ें या बात करें रिजल्ट का स्ट्रेस दूर करने इन्हीं तरीकों को अपनाएं

कोई करीबी दोस्त, भाई-बहन या जिस रिश्तेदार से आप हर बात साझा कर लेते हों उससे बात करें। ऐसा करने से डिप्रेशन की कंडीशन से बाहर निकलने में हेल्प मिलेगी।

एजुकेशन डेस्क। दिन पर दिन बढ़ता हुआ कम्पटीशन स्टूडेंट्स को और भी ज्यादा परेशान करता है। किसी भी पेरेंट को अपने बच्चे के 90% से कम मार्क्स मंजूर नहीं हैं। क्योंकि इससे कम मार्क्स में न अच्छा स्कूल मिलेगा, न कॉलेज और फिर इसके बाद अच्छी जॉब भी नहीं मिलेगी। ये सारे रीजन मिलकर बच्चों के ऊपर मेंटल प्रेशर देते हैं। बढ़ते कॉम्पटीशन का हवाला देना, दूसरे बच्चों से उनकी तुलना करना, कम नंबर आने पर बुरे अंजाम का डर उनके दिमाग में बिठाकर पेरेंट्स बच्चों का मनोबल तोड़ते हैं। लेकिन अगर चाहते हैं कि आपका बच्चा तनाव ना ले, तो पेरेंट्स और बच्चों दोनों को कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। 

रोजाना योग करें

एग्जाम रिजल्ट पास आने लगे तो दोस्त, रिश्तेदार सभी तरह-तरह की बातें कर बच्चे के दिमाग में स्ट्रेस को बढाते हैं। ऐसे में एक गहरी सांस लें और 10 मिनट के लिए वॉक पर निकल जाएं। स्ट्रेस छूमंतर हो जायेगा।

खुद को समय दें

जिंदगी के अहम फैसले हमसे बेहतर कोई नहीं ले सकता है। हम क्या सोचते हैं, क्या समझते हैं, हमसे बेहतर कोई नहीं जान सकता है। इसलिए हमेशा अपने मन सुनें। खुद से बात करनी चाहिए। हर समस्या का हल मिलेगा। 

करीबी लोगों से बात करें

कोई करीबी दोस्त, भाई-बहन या जिस रिश्तेदार से आप हर बात साझा कर लेते हों उससे बात करें। उन्हें अपने दिमाग में चल रही हलचल से रूबरू कराएं। हो सकता है कोई बेहतर सुझाव मिल जाए।

डायरी लिखें

लिखना स्ट्रेस को कम करने की एक अच्छी थेरेपी मानी जाती है। जब दिमाग में परेशानी का तूफ़ान चल रहा हो तो उस सब को पेपर पर लिख डालें। अच्छा महसूस करेंगे। लेकिन इसे बार-बार पढ़ें नहीं। 


स्ट्रेस को बाहर निकालें

स्ट्रेस से बाहर आने में जो भी चीज मदद करती है, वह काम करें। कुछ म्यूजिक सुनना पसंद करते हैं तो कुछ डांस या एक्सरसाइज करते हैं। वहीं कुछ का मन रोने से हल्का हो जाता है और वे रिलैक्स फील करते हैं। 

पेरेंट्स की ड्यूटी 

केवल बच्चे ही नहीं, अगर उनके पेरेंट्स कोशिश करें तो बच्चे स्ट्रेस से दूर रहेंगे। बच्चों पर नजर रखें, उनके बढ़ते स्ट्रेस पर एक्शन लें। उनके साथ बातें करें, उनके मन की बातों ओ बाहर निकालें और अगर वे प्रॉब्लम में दिखें तो उनकी मदद करें। भूल से भी उनकी तुलना दूसरे बच्चों से ना करें, उनकी कमियां ना निकालें। ऐसा करने से उनका मेंटल स्ट्रेस और बढ़ जायेगा। 

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