IIT-JEE 2018: अब नहीं होगा रैंक में कन्फयूजन, पॉजिटिव आन्सर बनेंगे टाई ब्रेकर

जेईई एडवांस में मार्क्स टाई होने पर रैंक निर्धारण का नया नियम लागू किया गया है। इसके तहत स्टूडेंट्स के गलत आन्सर उसकी रैंक को प्रभावित कर सकते हैं।

कोटा। आईआईटी कानपुर की ओर से आयोजित होने वाले जेईई एडवांस में टाईब्रेकर होने पर ज्यादा पॉजिटिव मार्क्स हासिल करने वाले स्टूडेंट को हायर रैंक दी जाएगी। अगर दो या उससे अधिक स्टूडेंट्स का स्कोर एक जैसा रहता है तो हायर रैंक का फैसला पॉजिटिव आन्सर्स के मार्क्स के बेस पर होगा। जेईई एडवांस के लिए जारी किए गए एफएक्यू में इस नियम का उल्लेख किया गया है।

फैसला नहीं तो फिर होगा ये..

पॉजिटिव आन्सर के मार्क्स भी सेम होते हैं तो दोनों स्टूडेंट्स के मैथ्स के नंबर देखे जाएंगे। मैथ्स में अधिक नंबर स्कोर करने वाले को हायर रैंक दी जाएगी। अगर पॉजिटिव मार्क्स और मैथ्स के मार्क्स की काउंटिंग भी एक जैसी होगी तो हायर रैंक का फैसला फिजिक्स के मार्क्स से किया जाएगा। तीनों ही स्टेज में टाईब्रेकर का फैसला नहीं हुआ तो दोनों स्टूडेंट्स को एक ही रैंक अलॉट कर दी जाएगी।

ये होते हैं अन्य एग्जाम में टाईब्रेकर के नियम

नीट में नंबर बराबर होते हैं तो पहले बॉयो, फिर केमेस्ट्री के नंबर से रैंक तय की जाती है। इसके बाद भी टाईब्रेकर रहता तो कम गलत सवाल करने व अधिक एज वाले कैंडिडेट को वेटेज दिया जाता है। जेईई मेन्स में पहले मैथ्स, फिर केमेस्ट्री के अंकों को वेटेज दी जाती है। इसके बाद भी फैसला नहीं होने पर एज को देखा जाता है। एम्स एंट्रेंस में पहले बॉयोलाजी, फिर केमेस्ट्री को वेटेज दिया जाता है।

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