सफलता के लिए पीटी, मेन्स और इंटरव्यू की इंटीग्रेटेड अप्रोच के साथ तैयारी करें: राजेंद्र पैंसिया

आईएएस का पद प्राप्त करने वाले राजेंद्र पेंसिया का कहना है एसडीएम रहते हुए समय प्रबंधन मेरे लिए खासा चुनौतीपूर्ण रहा क्योंकि पिछले कुछ सालों में पढ़ाई में अनियमितता और अनिश्

करियर डेस्क। राजेंद्र पैंसिया ने सिविल सेवा परीक्षा (2014) में आई.ए.एस. का पद प्राप्त करने में सफलता हासिल की है। इससे पहले इन्होंने राजस्थान लोक सेवा आयोग की परीक्षा में भी सफलता का परचम लहराते हुए एस.डी.एम. का पद प्राप्त किया था। राजेंद्र पैंसिया ने इंटरव्यू के दौरान अपनी सफलता का सीक्रेट शेयर किया। बातचीत के कुछ अंश...

सवाल: यूं तो सफलता कई कारकों पर निर्भर होती है, पर हर सफल व्यक्ति के पास कुछ विशेष सूत्र होते हैं। आपकी सफलता के मूल में कौन-से सूत्र रहे?
जवाब:
मेरा मानना है कि कोई व्यक्ति तभी सफल होता है जब वह कुछ अलग तरह से कार्य करता है। मेरी सफलता के सूत्र हैं 3P + HDC = Plan, Preparation and Presentation with Hard Work, Devotion and Continuity (अर्थात् योजना, तैयारी एवं प्रस्तुतीकरण + कठिन परिश्रम, समर्पण एवं निरंतरता)।

सवाल : आपका वैकल्पिक विषय क्या था? क्या इसकी पढ़ाई आपने स्नातक या आगे के स्तर पर की थी? 
जवाब:
मेरा वैकल्पिक विषय भूगोल था लेकिन मैंने दर्शनशास्त्र ले लिया। मैं वाणिज्य से स्नातक हू। इसलिए मैंने दर्शनशास्त्र को किसी स्तर पर नहीं पढ़ा। दर्शनशास्त्र के चयन का आधार मेरी रुचि तथा एक सही मार्गदर्शन रहा।

सवाल: क्या आपने वैकल्पिक विषय के चयन में उसकी लोकप्रियता को भी आधार बनाया था?
जवाब:
नहीं, ऐसा नहीं होता है। यह केवल लगता है क्योंकि सिविल सेवा में विषयों को लेकर कोई भेदभाव नहीं है। जो विषय छोटा लगता है उसमें गहराई अधिक होती है तथा जो विषय बड़ा लगता है वह थोड़ा आसान होता है। यही गहराई और विस्तार ही सिविल सेवा की खूबसूरती है। हां, एक बात ज़रूर है कि कई बार कुछ विषयों में अंक अधिक आने की परम्परा मान ली जाती है। मैंने वैकल्पिक विषय चयन में लोकप्रियता की बजाय अपनी रुचि, अंकदायी विषय और सही मार्गदर्शन को आधार बनाया।

सवाल: तैयारी के लिए कौन-सी पुस्तकें, पत्र-पत्रिकाएं पढ़नी चाहिए? 
जवाब:
सामान्य अध्ययन के लिए आधुनिक भारत का इतिहास- स्पेक्ट्रम, राजव्यवस्था- लक्ष्मीकांत, भूगोल-महेश वर्णवाल, अर्थव्यवस्था- अरिहन्त मेगा बुक, पर्यावरण-परीक्षा वाणी और ‘दृष्टि’ के नोट्स और आपणो प्रकाशन की हिन्दी की पुस्तक, नीतिशास्त्र- दृष्टि और स्वयं के नोट्स। इनके अलावा ऑल इंडिया रेडियो, योजना, www.insightsonindia, mrunal.org की मदद भी लेते रहें। साथ ही मेरा साढ़े तीन घण्टे का सेमिनार भी यू-ट्यूब पर उपलब्ध है जिसे राजेन्द्र पैंसिया (RAJENDER PENSIYA) नाम से सर्च किया जा सकता है। 

सवाल: तैयारी के दौरान समय प्रबंधन एक गंभीर चुनौती है। इसका हल आपने कैसे निकाला?
जवाब:
एसडीएम रहते हुए समय प्रबंधन मेरे लिए खासा चुनौतीपूर्ण रहा क्योंकि पिछले चार वर्षों में पढ़ाई में अनियमितता और अनिश्चितता आ गई थी, फिर भी मैं घनश्याम मीणा (आई.ए.एस. 2015), अनीता यादव (ए.सी.टी.ओ.) तथा अजीत मीणा (आई.आर.टी.एस.) के साथ रोज़ाना चार घंटे पढ़ाई करता था।

सवाल: सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू करने के लिए सबसे उपयुक्त समय क्या है? आपने तैयारी कब शुरू कर दी थी?
राजेन्द्र पैंसियाः
स्नातक के दौरान ही तैयारी शुरू करना सर्वश्रेष्ठ है किंतु मैंने तो 2010 में एस.डी.एम. बनने के बाद पहली बार सिविल सेवा परीक्षा दी। हालाँकि यह प्रश्न बहुत ही सब्जेक्टिव है क्योंकि ‘जब जागो तभी सवेरा’ हो जाता है। जितेन्द्र सोनी जी (आई.ए.एस.), गौरव अग्रवाल जी (आई.ए.एस.) और मैंने बहुत देरी से तैयारी करने के बाद भी सफलता हासिल की है वहीं शंकर जांगिड़ (आई.आर.एस.) और पार्थ (आई.ए.एस. 2015) ने तैयारी प्रारम्भ करते ही सफलता हासिल कर ली।

सवाल: प्रारंभिक परीक्षा एवं मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के विस्तृत पाठ्यक्रम को देखते हुए इसकी तैयारी के लिये क्या रणनीति अपनाई?
जवाब :
मेरा मानना है कि जल्द सफलता के लिये पीटी, मेन्स और इंटरव्यू तीनों की इंटीग्रेटेड अप्रोच के साथ तैयारी की जानी चाहिए। फिर भी हर परीक्षा से ढाई-तीन महीने पहले उस पर विशेष फोकस किया जाए।

सवाल: अपनी सफलता का श्रेय किन्हें देना चाहेंगे?
जवाब:
मेरी सफलता में प्रत्यक्ष रूप से बहुत से लोगों का योगदान है लेकिन विशेष तौर पर माता-पिता, गुरुजनों, सुनीता, परिवारजनों, प्रवीण भाटिया सर (भाटिया आश्रम, सूरतगढ़), सरोज सर, विकास दिव्यकीर्ति सर, के.डी. सर, डॉ. हुकम, संदीप मीणा, जितेन्द्र सोनी जी (आई.ए.एस.), अशोक सुथार (आई.आर.एस.), प्रवीण अडायच (आई.ए.एस.), राकेश पुरोहित (आर.डी.एस.), दीपक नन्दी जी (आर.ए.एस), प्रदीप बोरड़ जी (आर.ए.एस.) आदि का सहयोग रहा।

सवाल: नोट्स बनाने चाहिए या नहीं; और अगर बनाने चाहिए तो कितने और कैसे? 
जवाब:
मेरा अनुभव यह है कि वर्तमान में नोट्स की उपलब्धता पर्याप्त मात्रा में है। इसलिए नोट्स की बजाय बुलेट प्वाइंट्स को लेकर सिनोप्सिस बनाएं ताकि इनका अधिक- से- अधिक रिवीज़न हो सके, खासकर परीक्षा के दौरान।

सवाल: निबंध की तैयारी कैसे की? विषय चयन को लेकर क्या रणनीति अपनायी?
जवाब:
मैं स्वयं निबंध और नीतिशास्त्र पढ़ाता रहा हूं और निबंध लेखन से संबंधित ‘आपणो प्रकाशन’ की मेरी एक पुस्तक भी आई है। निबंध में मेरे हमेशा अच्छे अंक आते रहे हैं और यह मेरा मज़बूत पक्ष रहा है; फिर भी मैंने निबंध की टेस्ट सीरीज़ दी तथा रुचि के अनुसार परीक्षा भवन में निबंध का चयन किया।

सवाल : मुख्य परीक्षा में सफलता का बड़ा आधार उत्कृष्ट उत्तर लेखन शैली में छिपा है। उत्तर लिखने की शैली कैसी होनी चाहिये? 
जवाब:
मैं सहमत हूं क्योंकि यदि अच्छी लेखन शैली है तो कम सूचना होने पर भी उत्तर के सभी पक्षों को समग्रता, विश्लेषण, संतुलन तथा पिन-प्वाइंट तरीके से लिख सकते हैं। मैं स्वयं राइटिंग स्किल की क्लास लेता हूं, इसलिये मेरा मानना है कि नियमित अभ्यास, टेस्ट सीरीज़ और सही मार्गदर्शन से उत्कृष्ट लेखन शैली विकसित की जा सकती है।

सवाल: साक्षात्कार की तैयारी कैसे की? क्या तैयारी सचमुच साक्षात्कार में मदद करती है? 
जवाब:
वैसे तो साक्षात्कार व्यक्तित्त्व का परीक्षण होने के कारण अभी तक के पूरे जीवन की परीक्षा है, फिर भी मेरी समझ में अपनी कुछ कमज़ोरियों को दूर करके पर्सनैलिटी पर पॉलिश करने में मॉक-इन्टरव्यू मदद करता है। इंटरव्यू में मैंनें नेवी ब्ल्यू सूट, लाइट ब्ल्यू टाई, स्काई ब्ल्यू शर्ट पहनी थी। 

सवाल: ज्यादातर टॉपर इंटरव्यू से तुरंत पहले काफी नर्वस रहते हैं, क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ या आपको बिल्कुल तनाव नहीं हुआ?
जवाब:
जब मैंने प्रथम दो साक्षात्कार दिए तब थोड़ा नर्वस था लेकिन इस बार कई मॉक इन्टरव्यू देने के बाद काफी कॉन्फिडेंट था। इस बार तो साक्षात्कार देने के लिए उत्साहित था।

सवाल: सोशल नेटवर्किंग साइट्स का वर्तमान में इस परीक्षा की तैयारी में क्या महत्त्व है?
जवाब:
सोशल मीडिया हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है। इसलिए इस प्लेटफॉर्म का यूज़ किया जाए, न कि मिसयूज़। साथ ही आधे घंटे से ज्य़ादा समय इसे न दें तो मेरी नज़र में बेहतर होगा।

सवाल: आपकी हॉबीज क्या-क्या हैं? क्या तैयारी के दौरान रुचियों की कुछ भूमिका होती हैं?
जवाब:
मेरी रुचि योग, शतरंज, बैडमिंटन, वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी, अध्यापन और अभ्यर्थियों को मार्गदर्शन देने में है। रुचियां और अभिरुचियां व्यक्तित्व में पूर्णता लाती हैं जिसकी साक्षात्कार में सर्वाधिक और प्रारम्भिक व मुख्य परीक्षा में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। 

साभार: दृष्टि आईएएस

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