एक नियम, एक जैसे संस्थान, लेकिन प्रोफेसर्स भर्ती के लिए योग्यता मापदंड अलग-अलग

एनआईटी, आईआईईएसटी में असिस्टेंट प्रोफेसर्स, एसोसिएट प्रोफेसर्स और प्रोफेसर्स की नियुक्ति प्रक्रिया पर विवाद। 6 हजार पदों पर होना है भर्ती, मप्र सहित कई राज्यों में योग्य उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया से बाहर

हरेकृष्ण दुबोलिया.भोपाल। तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में देश के सबसे अग्रणी संस्थान माने जाने वाले राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) और भारतीय अभियांत्रिकी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईईएसटी) में की जा रही फैकल्टी नियुक्ति विवादों के घेरे में है। असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर की भर्ती के लिए समान योग्यता वाले उम्मीदवार किसी एनआईटी में पात्र माने जा रहे हैं तो कहीं उसे अपात्र मानकर उनका आवेदन खारिज कर दिया जा रहा है। पात्रता और अपात्रता के निर्धारण का यह विवाद अध्यापन के अनुभव वाले संस्थान को लेकर है। असमानता और मापदंडों में भेदभाव के कारण मप्र, महाराष्ट्र और राजस्थान समेत कई राज्य सरकारों के बड़े संस्थानों, यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों से अनुभव प्राप्त योग्य और काबिल प्राध्यापक एनआईटी की भर्ती प्रक्रिया से ही बाहर हो गए हैं। वहीं एनआईटी इलाहाबाद, गोवा, त्रिचरापल्ली और राउरकेला ने राज्यों के सरकारी संस्थानों, अर्द्ध सरकारी संस्थान और स्वायत्तशासी संस्थानों के उम्मीदवारों को भी केंद्रीय संस्थानों के उम्मीदवारों के समकक्ष मानकर भर्ती के लिए पात्र पाया है।

शिकायतों के बाद सामने आया मामला

एनआईटी कुरुक्षेत्र में इसी तरह के विवादों के कारण हाईकोर्ट ने भर्ती को ही स्टे कर दिया है। वहीं कई संस्थान ऐसे भी हैं, जिन्होंने अब तक विख्यात संस्थान पर कोई निर्णय ही नहीं लिया है, न ही उनके भर्ती विज्ञापन में इसका कोई जिक्र है। ये स्थिति तब है जब एक ही नियम के आधार पर एक जैसे संस्थानों में एक समान पदों पर भर्तियां की जा रही हैं, लेकिन पात्रता के मापदंड सबने अपने-अपने हिसाब से तय कर लिए हैं। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक देशभर से असमान मापदंडों और भेदभाव की लगभग 100 से अधिक शिकायतें अब मिल चुकीं हैं। इनमें सबसे ज्यादा शिकायतें मध्यप्रदेश से आई हैं। 

6 हजार से अधिक पदों पर होनी है भर्तियां 

देशभर में एनआईटी और आईआईईएसटी संस्थानों में लगभग 6 हजार असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर्स के पदों पर भर्तियां जारी हैं। गौरतलब है कि हर राज्य में एक एनआईटी (देशभर में कुल 31) और देशभर में केवल 3 आईआईईएसटी (शिवपुर, कोची और विशाखापटनम) हैं। यह सभी स्वशासी संस्थान हैं, जो केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन संचालित होते हैं। इन संस्थानों की प्रशासनिक व्यवस्था इनका बोर्ड ऑफ गवर्नेंस के हाथ में होती है, जिसका गठन एमएचआरडी करता है। राष्ट्रीय महत्व के इन संस्थानों का वित्तीय प्रबंध और नीति नियम एमएचआरडी स्तर पर ही तय होते है। 

किस एनआईटी में कितनी भर्तियां 

  • भोपाल - 161
  • रायपुर - 55 
  • इलाहबाद - 178
  • पटना - 122 
  • जमशेदपुर - 127
  • कुरुक्षेत्र - 127 
  • जालंधर - 185
  • कालीकट - 145 
  • त्रिचरापल्ली - 177
  • दुर्गापुर (पं.बंगाल) - 104 
  • मणिपुर - 22
  • पुदुचेरी - 17
  • गोवा - 4 

इस संशोधन नियम के कारण समस्या

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने जुलाई 2017 में एनआईटी और आईआईईएसटी के लिए भर्ती नियम 2009 में संशोधन किया था। इसमें दो अहम बातें थीं, जो फैकल्टी की भर्ती के पुराने नियमों से अलग थीं। 

नियम 1 - पीएचडी के साथ प्रथम श्रेणी डिग्री जरूरी

नई भर्तियों में पीएचडी के साथ-साथ पूर्ववर्ती (प्रसीडिंग) डिग्रियों में प्रथम श्रेणी होना अनिवार्य। जबकि इस नियम से पहले पूर्ववर्ती डिग्री में 55% से पास होना जरूरी था। 
विवाद क्यों : केंद्र और राज्यों के संस्थानों में ऐसे कई असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर कार्यरत हैं, जिनकी प्रथम श्रेणी डिग्री नहीं हैं। लेकिन एसोसिएट प्रोफेसर पद पर रहते हुए पीएचडी के बाद लगातार सात वर्ष के अनुभव के कारण नियमानुसार वे प्रोफेसर पद के लिए पात्र हो चुके हैं। जबकि एमएचआरडी ने एनआईटी की मौजूदा फैकल्टी को प्रमोशन में प्रसीडिंग डिग्रियों में थ्रोआउट फर्स्ट क्लास से छूट दे दी है।  
असर : अन्य संस्थानों से आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को छूट नहीं मिलने से वे हायर स्केल वाली प्रोफेसर की पोस्ट की दौड़ से बाहर हो गए। 

नियम-2 -विख्यात संस्थानों का अनुभव ही मान्य 

आवेदनकर्ताओं के अनुभव की मान्यता के लिए विख्यात संस्थान (इंस्टीट्यूट ऑफ रेप्यूट) शब्द परिनियम में शामिल किया गया। यानी केवल उन्हीं संस्थानों में अध्यापन का अनुभव मान्य किया जाएगा जो विख्यात संस्थान होंगे, लेकिन विख्यात संस्थान की कोई परिभाषा इस परिनियम में स्पष्ट नहीं की गई।। 
विवाद क्यों : एनआईटी भोपाल, नागपुर और जयपुर ने अपने स्तर पर ही इंस्टीट्यूट ऑफ रेप्यूट की परिभाषा तय की। जिसमें आईआईटी, आईआईएम और एनआईटी के केवल उन 100 संस्थानों को शामिल किया, जो एनआईआरएफ (नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैकिंग फ्रेमवर्क) की रैकिंग सूची में थे। यह रैकिंग 2016 से शुरू हुई है। 
असर : हजारों उम्मीदवार जिनका अध्यापन का अनुभव आईआईटी, आईआईएम और एनआईटीएस का नहीं हैं, लेकिन एकेडमिक अनुभव और ट्रैक रिकाॅर्ड चाहे कितना भी अच्छा हो, वे नियुक्ति प्रक्रिया से ही बाहर हो गए हैं। 

 

राष्ट्रीय स्तर पर असमानताएं ठीक नहीं 

सभी एनआईटी की वर्तमान फैकल्टी को प्रमोशन में पीएचडी के साथ थ्रू आउट फर्स्ट क्लास से छूट दी जा रही है। लेकिन बाहरी लोगों को यह छूट नहीं मिलेगी। इस संबंध में सभी एनआईटी को निर्देश भेज दिए हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ रेप्यूट तय करने का अधिकार संबंधित संस्थान को ही दिया गया था। सभी एनआईटी स्वायत्त संस्थान हैं, वे खुद यह तय कर सकते हैं, लेकिन इससे राष्ट्रीय स्तर पर जो असमानताएं आई हैं, वे ठीक नहीं हैं, इन्हें दूर करने के लिए एमएचआरडी विचार कर रहा है। 
एके सिंह, अंडर सेक्र्टरी, मानव संसाधन विकास मंत्रालय 

 इस विषय पर ज्यादा बात करना अभी ठीक नहीं हैं। क्योंकि नियुक्ति प्रक्रिया जारी है। इंस्टीट्यूट अॉफ रेप्यूट का डिसीजन बोर्ड ऑफ गर्वनेंस ने लिया है। मैं इस पर बात नहीं करूंगा। प्रेसाइडिंग डिग्री में एनआईटी के लोगों को थ्रू-आउट फर्स्ट क्लास की जरूरत नहीं हैं। यह छूट हमने नहीं, बल्कि एमएचआरडी भी दे चुका है। 
-प्रो. एनएस रघुवंशी, डायरेक्टर- मौलाना आजाद, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी 

मैनिट ने जब रिक्रूटमेंट एडवर्टीजमेंट जारी किया था, उसमें कहीं भी स्पष्ट नहीं किया गया था कि एक्सपीरियंस के लिए एनआईआरएफ को माना जाएगा। यदि ऐसा होता है तो मैं और मेरे जैसे तमाम लोग आवेदन ही नहीं करते। क्योंकि कोई भी उम्मीदवार केंद्रीय संस्थानों में सिर्फ 3 बार ही आवेदन कर सकता है। भर्ती विज्ञापन के बाद अलग-अलग नियम और शर्तें लगाना यह अपारदर्शी और अन्यायपूर्ण व्यवस्था हैं। नागपुर और जयपुर ने भी ऐसा ही किया। 
- डॉ. बसंत अग्रवाल, असिस्टेंट प्रोफेसर, एसजीएसआईटी इंदौर 

 

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