NEET 2018 : कटऑफ रहेगा कम, 18 प्रतिशत पर भी मिल सकेगा एडमिशन

इस साल से 5 नए मेडिकल कॉलेजों को भी एमसीआई ने नीट में शामिल होने की अनुमति दे दी है। ऐसे में इस साल स्टूडेंट्स को करीब 500 अधिक सीटों में एडमिशन लेने का मौका मिलेगा।

एजुकेशन डेस्क । सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेन्डरी एजुकेशन 6 मई को नीट कराने जा रहा है। इसमें शामिल होने वाले स्टूडेंट्स के लिए नई खुशखबरी आई है। इस साल से 5 नए मेडिकल कॉलेजों को भी एमसीआई ने नीट में शामिल होने की अनुमति दे दी है। ऐसे में इस साल स्टूडेंट्स को करीब 500 अधिक सीटों में एडमिशन लेने का मौका मिलेगा। नीट के माध्यम से पीजी की सीट्स भरने के लिए सरकार ने हाल ही में परसेंटाइल को पिछली बार की तुलना में 15 कम कर दिया है। जिससे अब सामान्य वर्ग में 35 प्रतिशत पर भी स्टूडेंट्स और आरक्षित वर्ग में 25 प्रतिशत पर भी स्टूडेंट्स को आसानी से एडमिशन मिल जाएगा।

18 प्रतिशत से कम वाले भी होंगे NEET का हिस्सा
नीट यूजी की बात करें, तो पिछले साल 2017 में 18 परसेंट तक के स्टूडेंट्स को काउंसलिंग में शामिल किया गया था। अब इस बार भी कम परसेंटेज वाले स्टूडेंट्स नीट क्वालिफाई कर पाएंगे। सीबीएसई परसेंटाइल के अनुसार इंडिविजुअल सब्जेक्ट में पासिंग मार्क्स क्राइटेरिया से कम होने पर भी यदि टोटल परसेंटाइल 18 प्रतिशत के भीतर है, तो स्टूडेंट नीट काउंसलिंग का हिस्सा बन सकते हैं। 

पिछले सालों का कट ऑफ
2016-17 में हुई काउंसलिंग में 20 या 18 प्रतिशत तक लाने वाले स्टूडेंट्स भी नीट काउंसलिंग का हिस्सा बने, ऐसे में यदि स्टूडेंट को बायोलॉजी में 20 प्रतिशत मार्क्स मिले हैं और फिजिकल में सिर्फ 5 प्रतिशत, तो भी स्टूडेंट आराम से काउंसलिंग में अपीयर हो सकता है। जबकि, 2015 में नीट में जनरल कैटेगरी में 50 प्रतिशत मार्क्स और रिजर्व में 40 प्रतिशत कटऑफ रखा गया था। ऐसे में 720 में 360 मार्क्स लाना जरूरी था। 2016 में परसेंटाइल मेथड लागू होने के कारण 50वीं और 40वीं परसेंटाइल वाले को एडमिशन दिया गया। जिसकी वजह से 18 से 20 परसेंट स्कोर करने वाले स्टूडेंट्स जिनके मार्क्स 131 से 145 थे, उन्हें भी एमबीबीएस में एडमिशन के लिए एलिजिबल माना गया। 

एग्जिट टेस्ट किया जा रहा है प्लान 
एक्सपर्ट के मुताबिक, कम मार्क्स पर भी स्टूडेंट्स को मेडिकल में एडमिशन मिलने से डॉक्टर्स की क्वालिटी में गिरावट आएगी जो समाज पर प्रभाव डालेगी। यही वजह है कि एमबीबीएस के बाद भी डॉक्टर टाइटल के लिए एक्जिट टेस्ट प्लान किया जा रहा है। इसमें रिजर्व और जनरल कैटेगरी के पासिंग मार्क्स तय किए जाएंगे, ताकि सोसायटी को बेहतर डॉक्टर्स मिलें। 

सीबीएसई ने बदला क्वालिफाई क्राइटेरिया 
एक्सपर्ट्स के अनुसार पिछले कुछ सालों से रिजर्व सीट्स खाली जा रही थीं, इन्हें भरने जनरल में कन्वर्ट कर दिया जाता था। अब सरकार चाहती है कि मेडिकल रिजर्व सीट्स से केवल रिजर्वेशन वाले स्टूडेंट्स को फायदा हो। सीबीएसई ने नीट में परसेंटाइल लागू कर क्वालिफाई क्राइटेरिया बदला। रिजर्व कैटेगरी में 40% लाना मुश्किल हो रहा है, यही वजह है कि पासिंग परसेंटेज कम कर दिए गए हैं। 

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