IITJEE के मिरेकल मैन, जिनसे पढ़ना सफलता की गारंटी, बनाया नेशनल रिकॉर्ड

IIT के एक टीचर ने एक Positive गुरुकुल की स्थापना की है। यहां पर एक ही घर में बच्चे एक साथ रहकर पढ़ते हैं। भोपाल में पहले बैच से ही इन्होंने IIT जोन टॉपर दिया।

एजुकेशन डेस्क । IIT के एक टीचर ने एक Positive गुरुकुल की स्थापना की है। यहां पर एक ही घर में बच्चे एक साथ रहकर पढ़ते हैं। बच्चों का खाना इस 'मिरेकल मैन' के नाम से मशहूर प्रोफेसर सुमित उपमन्यु की पत्नी और मां बनाती हैं। इन्होंने 3 साल में 4 IIT जोन टॉपर दिए हैं। ऐसा कोटा का कोई भी संस्थान नहीं कर सका।

बेस्ट कोचिंग इंस्टीट्यूट की तलाश...
ये मिरेकल तब संभव हो पाया जब बच्चों से ज्यादा मेहनत उनके इस टीचर ने की। बता दें, भारत में 12 लाख बच्चे हर साल सबसे कठिन माने जाने वाले एग्जाम IIT-JEE की तैयारी के लिए सबसे BEST IIT-JEE Coaching की तलाश में रहते हैं। आज हम आपको उस टीचर से मिलाने जा रहे हैं, जिसने ये 'चमत्कार' करके दिखाया है। इस साल इस 'मिरेकल' टीचर का लक्ष्य 500 ऐसे बच्चों को सिलेक्ट करवाना है, जो पढ़ने में एवरेज या एवरेज से थोड़ा ज्यादा लेवल के हैं।

बनाया नेशनल रिकॉर्ड
प्रोफेसर सुमित उपमन्यु ने मात्र 450 स्टूडेंट्स से नेशनल रिकॉर्ड बनाया है। स्कूल के दिनों से ही पढ़ाई में तेज उपमन्यु का चयन सेंट्रल इंडिया के हार्वर्ड कहे जाने वाले GSITS कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में हुआ था, लेकिन पढ़ाने की ललक और 'फैक्ट्रीनुमा' कोचिंग संस्थानों की हालत देखकर उन्होंने अपना संस्थान शुरू करने का सपना देखा।

गुरुकुल जैसा है CatalyseR-
IIT के मिरेकल मैन कहलाने वाले इस आधुनिक शिक्षा महर्षि ने CatalyseR संस्थान की स्थापना की, जिसके आज देश में 8 शहरों में सेंटर्स हैं। तकरीबन सभी सेंटर्स के विद्यार्थी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। भोपाल में पहले बैच से ही इन्होंने IIT जोन टॉपर दिया। इस साल यही चमत्कार ये वडोदरा से करने जा रहे हैं। प्रोफेसर उपमन्यु का सपना ऐसे गुरुकुल की स्थापना था, जिसमें प्रतिभा अपने श्रेष्ठ मुकाम तक पहुंच सके। यही कारण है कि आज CatalyseR पूरे भारत में IIT-JEE का नेशनल रिकॉर्ड बना चुका है। आज सैकड़ों टीचर्स CatalyseR के 8 विभिन्न संस्थानों पर अपनी सेवाएं देकर स्टूडेंट्स के सपनों को पूरा करने में उनकी मदद कर रहे हैं। आज प्रोफेसर उपमन्यु का सपना साकार हो चुका है और उनका संस्थान CatalyseR सिर्फ मप्र ही नहीं, पूरे देश में IIT-JEE कोचिंग के लिए सबसे बेस्ट माना जाता है।

सबसे ज्यादा सिलेक्शन का रिकॉर्ड
प्रोफेसर सुमित उपमन्यु के खाते में IIT-JEE के लिए हर साल सबसे ज्यादा सिलेक्शन देने का रिकॉर्ड है। जब उनसे पूछा जाता है कि उन्होंने सफलता कैसे पाई, तो कहते हैं- “दूसरे कोचिंग संस्थान आज फैक्ट्री की तरह काम कर रहे हैं। उनके लिए एडमिशन और फीस ही टारगेट है। बच्चों को सही गाइडेंस देकर उनका सिलेक्शन सुनिश्चित कराना नहीं।''

लक्ष्य 500 में से न्यूनतम 300 बच्चों को IIT क्रैक कराना
“बेहतरीन बच्चे तो वैसे ही मेरे पास आते हैं, लेकिन इस बार मेरा लक्ष्य 500 बच्चों में से कम से कम 300 बच्चों को IIT क्रैक कराना है। ये बच्चे ऐसे होंगे जो आमतौर पर सफल नहीं हो पाते। हम ऐसे ही 500 बच्चों को सबसे पहले एडमिशन देंगे।“ प्रोफेसर सुमित उपमन्यु कहते हैं, “शिक्षण संस्थान जब तक बच्चों के 360 डिग्री विकास पर ध्यान नहीं देते, सुबह से रात तक उनकी दिनचर्या व्यवस्थित नहीं करते, तब तक IIT में सर्वश्रेष्ठ परिणाम ले पाना सपना मात्र है।’ प्रोफेसर सुमित बताते हैं, “मैंने पाया है कि कोचिंग इंस्टीट्यूट बच्चों को सिर्फ पढ़ाते हैं और पढ़ाने के बाद उन्हें छोड़ देते हैं। ऐसा करने से उनकी प्रतिभा स्ट्रीमलाइन नहीं हो पाती। मैंने सबसे पहले जिस पर ध्यान दिया, वो बच्चों की सकारात्मक ऊर्जा (पॉजिटिव एनर्जी) को स्ट्रीमलाइन करना था।“ इसी उद्देश्य से सुमित उपमन्यु ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर CatalyseR की स्थापना की है।

स्टूडेंट्स ने बताया सक्सेस मंत्रा

1-जो हूं,उन्हीं के कारण हूं-
मैंने CatalyseR 8वीं क्लास में ज्वाइन किया था। मैं शुरू से ही किसी के सामने बहुत कम खुल पाता था। उपमन्यु सर मेरे जीवन के पहले टीचर रहे, जिन्होंने मेरी झिझक को दूर किया और मुझे हमेशा आगे बढ़ने के लिए मोटिवेट किया। मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं कि आज मैं और मेरे कई स्टूडेंट्स जो हैं, उन्हीं के कारण हैं।

- कार्तिक पाटेकर, AIR-6, Delhi Zone Topper

2-स्टूडेंट्स के साथ रातभर जागते थे उपमन्यु सर
CatalyseR में शुरुआत में मेरे जैसे ज्यादातर स्टूडेंट्स एवरेज ही होते थे। उपमन्यु सर ने ध्यान दिया कि पढ़ाई के लिए उत्साहित होने पर भी रात को अधिक समय हम सेल्फ स्टडी नहीं कर पाते थे। सर का मानना था कि प्रतिभा की कमी अतिरिक्त कोशिशों से ही दूर की जा सकती है। सर ने उसी वक्त रात को भी क्लास में रुकने का निर्णय लिया। इससे 11 बजे सोने वाले स्टूडेंट्स भी रात 2 बजे तक पढ़ाई करने लगे। उपमन्यु सर के शब्दों में, ‘दिन में 3 घंटे की पढ़ाई यानी साल में 1095 घंटे बढ़ना।’ नतीजा भी वैसा ही आया, जैसा सर ने सोचा था। 24 में से 17 सिलेक्ट हुए।
- चहल नीमा, AIR-24 (IIT-JEE-2013)

3-सब फोकस करें, इसलिए सर ने खुद का FB अकाउंट बंद कर दिया...
एक बार उपमन्यु सर ने क्लास में किसी स्टडेंट्स को मोबाइल पर फेसबुक चलाते देखा। गरीब होने के बावजूद उसके पेरेंट्स बड़ी मुश्किल से उसे पढ़ा रहे थे। सर ने पहले तो उसे बहुत डांटा, फिर उसके पेरेंट्स को घटना की जानकारी देने के लिए खुद कॉल किया। फिर जब क्लास में आए तो उन्होंने कहा- “मैं कल रात ठीक से सो नहीं पाया, क्योंकि मेरा खुद भी FB पर अकाउंट था। मैंने आज सुबह क्लास आने से पहले अपना अकाउंट हमेशा के लिए डिलीट कर दिया। मैं जो न करने की अपेक्षा अपने स्टूडेंट्स से करता हूं, उसे खुद भी नहीं करूंगा। मुझमें आप लोगों को आज्ञा देने का नैतिक साहस और आप लोगों में मेरी आज्ञा मानने का विनय, ये तभी संभव है, जब मैं खुद पहले उदाहरण पेश करूं। मैंने वही किया।“ सर की ये बातें हमारे दिल को छू गईं। ऐसे गुरु कम ही मिलते हैं।
- गोविंद लाहोटी, AIR-3 (IIT-JEE-2014) Delhi Zone Topper

4- शरीर और समय की दीवार भी रोक नहीं सकती...

फैमिली के लिए एक बार सुमित सर का हरिद्वार जाना हुआ। लौटते हुए ट्रेन से उन्होंने मैसेज किया कि कल 6 बजे रोटेशनल डायनेमिक्स की एक्स्ट्रा क्लास लेंगे। 24 घंटे के सफर के बाद सर इंदौर स्टेशन से सीधे आकर एक्स्ट्रा क्लास लेंगे, ये सोचते ही मैंने और मेरे दोस्तों ने उनसे रिक्वेस्ट की कि क्लास अगले दिन रख लें, लेकिन सुमित सर को कन्विंस करना मुश्किल था। उस दिन संयोग से ट्रेन बीच में कहीं खराब हो गई। आपको आश्चर्य होगा कि सुमित सर वहीं उतरकर गांव की ठसाठस भरी बस में बैठे और न जाने कैसे 6 घंटे में इंदौर पहुंच गए। क्लास पहुंचने में सर 1 घंटे लेट हो गए। 30 घंटे के लगातार सफर के बाद सीधे क्लास में घुसते ही सर ने कहा- “सॉरी आय गॉट लेट!” हम चकित थे। ये मेरा सौभाग्य है कि सुमित सर जैसे गुरु का गाइडेंस मिला।
- मुकेश परीक, AIR-3 (IIT-JEE2015)

5-छाले ठीक होते कैसे...
मुझे याद है सर के मुंह में छाले थे। मुझे पता चला कि डॉक्टर्स ने इसका कारण अनियमित भोजन और चाय की लत को बताया। क्लास के बाद एक दिन मैंने सर से पूछा तो उन्होंने कहा- “डॉक्टर की सलाह सेहत के लिए तो ठीक है, पर इसे अपनाना उतना ही कठिन। पढ़ाते समय वक्त का ध्यान ही नहीं रहता।'' 
- शारविक मित्तल, AIR-29 (IIT-JEE2016) Kanpur Zone topper

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