मिलिए 3 फुट 2 इंच की आईएएस अफसर से, मोदी भी हैं जिनके मुरीद

आरती ने खुले में शौच से मुक्ति के लिए बंको बीकाणो अभियान चलाया था, जिसकी तारीफें आज भी की जाती हैं।

एजुकेशन डेस्क, जयपुर। राजस्थान में हाल ही में 81 आईएएस अफसरों के ट्रांसफर किए गए हैं। इन्हीं आईएएस अफसरों में से एक नाम आरती डोगरा का भी है। ये आरती डोगरा वही आईएएस अफसर हैं, जिनका कद नहीं बल्कि काम बोलता है। आरती डोगरा की हाईट महज 3 फुट 2 इंच है, लेकिन इन्होंने अपने काम से अपनी पहचान बनाई है। आरती डोगरा को डिस्कॉम की मैनेजमेंट डायरेक्ट से अजमेर के कलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आइए जानते हैं आरती डोगरा के बारे में...

देहरादून में हुई आरती की पढ़ाई

- सिर्फ 3 फुच 2 इंच की आईएएस अफसर आरती डोगरा का जन्म देहरादून में हुआ था और उनकी पढ़ाई भी यहीं के ब्राइटलैंड स्कूल से हुई है। 
- आरती का परिवार अभी भी देहरादून की विजय कॉलोनी में ही रहता है। वो अपने पिता कर्नल राजेंद्र डोगरा और मां कुमकुम की इकलौती बेटी हैं। 

पीएम मोदी भी हैं आरती के मुरीद

- आरती डोगरा का हाईट में भले ही कम हों, लेकिन उन्होंने अपने काम से अपनी पहचान बनाई है। राजस्थान के बीकानेर, जोधपुर और बूंदी जिलों में कलेक्टर रहते हुए आरती ने कई ऐसे काम किए हैं, जिनकी तारीफें बड़े-बड़े अधिकारी भी करते हैं। 
- लेकिन आरती को असली पहचान बीकानेर के कलेक्टर रहते हुए मिली। उन्होंने बीकानेर में खुले में शौच से मुक्ति के लिए 'बंको बिकाणो' अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान की देशभर में जमकर तारीफ हुई। इतना ही नहीं खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस काम के लिए आरती की तारीफ कर चुके हैं। 

आरती के पैरेंट्स ने दिया काफी साथ

- आरती के पिता एक आर्मी ऑफिसर हैं, जबकि मां एक स्कूल टीचर रहीं हैं। आरती के पैदा होते ही लोगों ने उनकी हाईट और शारीरिक बनावट को लेकर सवाल उठाए, लेकिन उनके पैरेंट्स ने समाज की बातों को दरकिनार कर अपनी बेटी को सामान्य स्कूल में बाकी बच्चों के साथ पढ़ाई कराने का फैसला लिया। 
- एक इंटरव्यू के दौरान आरती ने बताया था कि लोग उनकी मां से दूसरे बच्चे के बारे में सवाल किया करते थे। लेकिन उनकी मां ने साफ कह दिया था कि एक बेटी ही काफी है। उन्होंने अपनी सफलता के लिए भी अपने मां-बाप को श्रेय दिया था।

फर्स्ट अटेंप्ट में ही क्रैक किया यूपीएससी

- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरती ने अपना ग्रेजुएशन दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कॉलेज से इकोनॉमिक्स में किया है। 
- बाद में पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए आरती देहरादून चलीं गईं, जहां उनकी मुलाकात आईएएस अफसर मनीषा पंवार से हुई। मनीषा से मुलाकात के बाद ही आरती ने भी आईएएस बनने का फैसला लिया।
- ये आरती के विश्वास और मेहनत का ही नतीजा था कि देश के सबसे कठिन माने जाने वाले यूपीएससी एग्जाम को उन्होंने अपने फर्स्ट अटेंप्ट में ही क्रैक कर लिया था।

'बंको बिकाणो' अभियान जैसे कई कामों को सराहा गया

- आरती अपनी कम हाईट से ज्यादा अपने काम को लेकर चर्चा में रहती हैं। बीकानेर की कलेक्टर रहते हुए आरती ने यहां बंको बीकाणो अभियान की शुरुआत की।
- इस अभियान के तहत उन्होंने लोगों को खुले में शौच नहीं करने के लिए प्रेरित किया। इसके लिए गांव-गांव में पक्के टॉयलेट्स बनाए गए, जिनकी मॉनिटरिंग मोबाइल सॉफ्टेवयर के जरिए की जाती थी।
- कहा जाता है कि इस अभियान को 195 ग्राम पंचायतों में शुरू किया गया था, जो सफल भी रहा था। इसके बाद ही आसपास के कई और जिलों में भी इस तरह के अभियानों की शुरुआत की गई।
- इसके साथ ही बीकानेर में ही आरती ने 'मिशन अगेंस्ट एनीमिया (MAA)' की शुरुआत की। इसके अलावा आरती ने अनाथ बच्चियों की सहायता के लिए भी काम किया है।

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