JEE Main भाेपाल: 306 अंकों के साथ हिमांशु टॉपर, केमेस्ट्री में 120 में से 120 अंक

JEE MAIN एग्जाम में हिमांश राठौर ने 306 अंकों के साथ शहर में पहली रैंक बनाई। उनकी ऑल इंडिया रैंक 177 है, जबकि केमेस्ट्री में इन्हें 120 में से 120 अंक मिले हैं। इनके अलावा आयुध सक्सेना को ऑल इंडिया 424 रैंक , अनिरुद्ध चिदर को 523 रैंक मिलीं हैं।

भोपाल । JEE MAIN एग्जाम में हिमांश राठौर ने 306 अंकों के साथ शहर में पहली रैंक बनाई। उनकी ऑल इंडिया रैंक 177 है, जबकि केमेस्ट्री में इन्हें 120 में से 120 अंक मिले हैं। इनके अलावा आयुध सक्सेना को ऑल इंडिया 424 रैंक, अनिरुद्ध चिदर को 523 रैंक, प्रखर दीवान को 540 रैंक, निश्चय मनवानी को ऑल इंडिया 613 रैंक, कौस्तुभ त्रिपाठी को 704 रैंक और श्रीवांशु गौर को ऑल इंडिया 1038 रैंक मिली।

परीक्षा का कट ऑफ इस बार 75 से 80 अंकों के बीच में होगा, यह कयास तो जेईई एडवांस की सीटों में बढ़ोत्तरी के कारण पहले ही लगाया जा रहा था, लेकिन सोमवार जारी हुए जेईई मेन्स के रिजल्ट में सामने आया कि इस बार कटऑफ में पिछले साल की तुलना में 6 अंकों की गिरावट आई है। जनरल कैटेगरी में पिछले साल एडवांस में अपीयर होने के लिए मिनिमम 81 मार्क्स लिए गए थे, वहीं इस बार 74 अंक वाले स्टूडेंट्स को भी एडवांस में बैठने का मौका मिलेगा।

9वीं से की थी तैयारी 
हिमांश राठौर बताते हैं कि मैंने 9वीं क्लास से जेईई की प्रिपरेशन शुरू कर दी थी, यही वजह है कि मुझे कम समय में ज्यादा से ज्यादा क्वेश्चंस अटैम्प्ट करने की अच्छी प्रैक्टिस थी। केमेस्ट्री मेरा हमेशा से स्ट्रॉन्ग सब्जेक्ट रहा है, यही वजह है कि केमेस्ट्री में मैंने 120/120 स्कोर किया। केवीपीवाय में मेरी ऑल इंडिया रैंक 125 थी। 

कोचिंग और स्कूल का तालमेल 
आयुध सक्सेना ने अपना सक्सेस मंत्र सांझा करते हुए कहा कि मैंने स्कूल की पढ़ाई और कोचिंग दोनों को बैलेंस किया, जितना समय कोचिंग को देता था, उतना ही क्लासरूम को भी फोकस में रखा। स्कूल में कोई भी क्लास इसलिए मिस नहीं की कि जेईई की प्रिपरेशन में बिजी हूं। मेन्स की प्रिपरेशन के लिए आखिरी महीने में 60 मॉक पेपर्स सॉल्व किए। 

केमेस्ट्री रहा स्ट्रॉन्ग 
अनिरुद्ध चिदर ने बताया कि केमेस्ट्री मेरा स्ट्रॉन्ग सब्जेक्ट है, इसीलिए मैंने इसे ही पहले अटैम्प्ट किया और लेंदी मैथ्स को सबसे बाद में चुना। 90 सवालों को समय पर सॉल्व करने के लिए पिछले एक महीने में 70 से ज्यादा मॉक पेपर्स सॉल्व किए, स्पीड अच्छी थी इसलिए मैं बेहतर स्कोर हासिल करने में सफल हो गया। 

मॉक टेस्ट ने की मदद 
प्रखर दीवान बताते हैं कि मैंने पूरे साल एनसीईआरटी और कोचिंग कंटेंट दोनों को ही फोकस में रखा। इस दौरान जेईई मेन्स के 60 से अधिक मॉक पेपर्स एक महीने में सॉल्व किए। पेपर सॉल्विंग प्रैक्टिस के कारण मैथ्स का लेंदी सेक्शन भी टाइम पर पूरा कर पाया। अगर प्रैक्टिस नहीं होती तो शायद बहुत दिक्क्त होती। 

इन फैक्टर्स से गिरा कट ऑफ 
- इस साल 2 लाख 31024 स्टूडेंट्स को एडवांस देने का मौका मिलेगा, इसलिए पिछले साल के मुकाबले इस साल मेरिट थोड़ी कम रहेगी। 
- इस साल के पेपर में 10 सवाल ऐसे थे, जो जेईई मेन्स के सिलेबस में तो हैं, लेकिन एडवांस के सिलेबस में नहीं हैं। ऐसे में जिन स्टूडेंट्स ने मात्र एडवांस के सिलेबस से    मेन्स की तैयारियां की थी, उनको नुकसान हुआ है।  
-16 सवाल ऐसे थे, जो पिछले तीन व चार साल के एग्जाम में आ रहे हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार पेपर आसान रहा। हालांकि, मैथ्स का पेपर लेंदी रहा। 
- ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही पेपर्स टफ थे, जिसके कारण इस बार कम मार्क्स आने पर भी स्टूडेंट्स को बेहतर स्कोर मिल पाया है।
 
-इस बार मेन्स का पैटर्न बहुत अलग था करीब 50% सवाल तो एनसीईआरटी से पूछे गए थे। इस वजह से एवरेज स्टूडेंट्स भी अच्छा परफॉर्म कर पाए। कटऑफ गिरने का बड़ा कारण जेईई एडवांस में अपीयर होने वाले स्टूडेंट्स की संख्या बढ़ना है, इससे कटऑफ भी गिरा। 
अभिषेक पाण्डेय, फिट्जी क्लासेस 

इस बार का पेपर स्टूडेंट्स के लिए थोड़ा टफ रहा, यही वजह है कि कम स्कोर वाले स्टूडेंट्स भी अच्छी ऑल इंडिया रैंक हासिल कर पाए हैं। जनरल कैटेगरी के करीब 1 लाख 11 हजार स्टूडेंट्स इस बार एडवांस में अपीयर होने जा रहे हैं। सीट्स बढ़ने का स्टूडेंट्स को फायदा मिला। 
 मितेश राठी, मितेश राठी क्लासेस 

 

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