काउंसलर से जानिए हैं एस्ट्रोनॉमी और एस्ट्रोफिजिक्स में करियर संभावनाएं

इन कोर्सेस के जरिए अंतरिक्ष के रहस्यों को जानने का मौका मिलता है।

करियर डेस्क । अंतरिक्ष में जाकर रिसर्च करना और यूनिवर्स के रहस्यों को जानना अगर आपका सपना है तो आप एस्ट्रोनॉमी/एस्ट्रोफिजिक्स पढ़कर इस क्षेत्र में काम कर सकते हैं। एक एस्ट्रोनॉमर या फिजिसिस्ट के रूप में आपको ग्रहों, तारों और गैलेक्सी जैसी आकाशीय वस्तुओं के अध्ययन के लिए मैथ्स और फिजिक्स के प्रिंसिपल लागू करने होते हैं। इसलिए यहां गहरी साइंटिफिक नॉलेज जरूरी है। बता रहे हैं एक्सपर्ट करियर काउंसलर जितिन चावला...

फिजिक्स में रुचि जरूरी 

खगोल विज्ञान में करियर बनाना चाहते हैं तो फिजिक्स में दिलचस्पी होनी जरूरी है। फिजिक्स में यूजी करने के बाद आप एस्ट्रोफिजिक्स/ एस्ट्रोनॉमी में पीजी और पीएचडी कर सकते हैं। एस्ट्रोनॉमी एक मल्टीडिसिप्लीनरी सब्जेक्ट है जिसमें आपको फिजिक्स के साथ केमिस्ट्री, मैथ्स, कम्प्यूटर साइंस, जियोलॉजी और बायोलॉजी का अध्ययन करना होता है। 


कहां है स्कोप

देश में रिसर्च एस्ट्रोनॉमर्स की भारी कमी है। आईआईए सहित देश में कई एस्ट्रोनॉमिकल इंस्टीट्यूट्स हैं जहां एस्ट्रोनॉमर्स की नियुक्ति की जाती है। ग्रेजुएशन के बाद स्टूडेंट्स नासा जैसे संस्थानों से रिसर्च कर सकते हैं। इसके अलावा इसरो, डीआरडीओ,आईआईए, भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर जैसे संस्थानों में भी बतौर एस्ट्रोनॉमर आपके लिए रिसर्च के मौके हैं। आप जेईएसटी, जैम जैसी परीक्षाओं के जरिए आईआईएसईआर, एनआईएसईआर, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल स्टडीज, आईएमएससी, एचआरआई, विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर आदि संस्थानों में भी रिसर्च कर सकते हैं। 


यहां से कर सकते हैं पढ़ाई 

12वीं के बाद इस विषय में ग्रेजुएशन करने के लिए आपको किसी फॉरेन यूनिवर्सिटी में आवेदन करना होगा क्योंकि इसके लिए देश में कोई इंस्टीट्यूट नहीं है। हालांकि आप आईआईएसईआर, एनआईएसईआर भुवनेश्वर, डीएई सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन बेसिक साइंस मुंबई, आईआईटी, बिट्स से आप चार व पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएस और एमएस कोर्स कर सकते हैं। इसके अलावा ग्रेजुएशन में फिजिक्स, मैथ्स, केमिस्ट्री व बीई इन फिजिक्स की पढ़ाई के बाद मास्टर व पीएचडी के लिए एस्ट्रोनॉमी सलेक्ट कर सकते हैं।

 

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