हायर एजुकेशन के लिए आएगी नई अथॉरिटी, सरकार बिल लाने तैयारी में

नई रेगुलेटर अथॉरिटी आ जाने के बाद UGC, AICTE और NCTE जैसी संस्थाएं खत्म हो जाएंगी।

एजुकेशन डेस्क। अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले हायर एजुकेशन को लेकर सरकार एक नई अथॉरिटी लाने की तैयारी कर रही है। बताया जा रहा है कि इसके लिए सरकार बिल लाने की तैयारी कर रही है और इसका ड्राफ्ट भी तैयार किया जा चुका है। ये अथॉरिटी देश की सभी यूनिवर्सिटीज़ और इंस्टीट्यूट्स को गाइड करने का काम करेगा, साथ ही नए कोर्सेस की शुरुआत का भी सुझाव दे सकेगा। 

UGC, AICTE और NCTE खत्म हो जाएंगी

- इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, सरकार हायर एजुकेशन इवेल्युएशन एंड रेगुलेशन अथॉरिटी 2018 यानी HEERA बिल या फिर हायर एजुकेशन रेगुलेटरी काउंसिल (HERC) के नाम से बिल लाने की तैयारी कर रही है।
- इसके लिए पिछली साल अप्रैल में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने एक 40 प्वॉइंट का एक्शन प्लान बताया था, जिसमें HEERA बिल के बारे में जानकारी दी गई थी। इस बिल को पहले सितंबर में पेश करने की बात कही गई थी।
- HEERA बिल के ड्राफ्ट के मुताबिक, नई हायर एजुकेशन अथॉरिटी आ जाने के बाद मौजूदा काम कर रहीं रेगुलटरी अथॉरिटी जैसे यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC), ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्नीकल एजुकेशन (AICTE) और नेशनल काउंसिल फॉर टेक्नीकल एजुकेशन (NCTE) को खत्म कर दिया जाएगा।

HEERA बिल में क्या होगा खास?

- बिल के ड्राफ्ट के मुताबिक, नई रेगुलेटर अथॉरिटी देश के सभी इंस्टीट्यूट्स के लिए क्वालिटी स्टैंडर्ड तय करेगी, जिसमें इंस्टीट्यूट्स की परफॉर्मेंस का हर साल इवेल्युएशन भी किया जाएगा।
- अथॉरिटी इंस्टीट्यूट्स को मार्गदर्शन देने का काम भी करेगा। इसके साथ ही अथॉरिटी के स्टैंडर्ड को पूरा करने पर ही इंस्टीट्यूट को केंद्र या राज्य सरकार से फंड मिल सकेगा।
- ये अथॉरिटी, UGC से ज्यादा पॉवरफुल होगा और इसके पास स्टैंडर्ड पूरा नहीं करने पर उस इंस्टीट्यूट की मान्यता रद्द करने का भी अधिकार होगा। इसके अलावा स्टैंडर्ड पूरा नहीं करने पर अथॉरिटी उस इंस्टीट्यूट में एडमिशन पर भी रोक लगा सकती है। 

HEERA में 10 मेंबर होंगे, 2 वाइस चेयरमैन

- जानकारी के मुताबिक, HEERA में 10 मेंबर होंगे और किसी एजुकेशनलिस्ट को इसके चेयरमैन के तौर पर अपॉइंट किया जाएगा। इसमें 2 वाइस चेयरमैन होंगे।
- इसके साथ ही 3 मेंबर ऐसे होंगे जिन्होंने कम से कम 5 साल तक आईआईटी, आईआईएम, आईआईएससी, आईआईएसईआर जैसी संस्थाओं में बतौर डायरेक्टर काम किया हो। 
- इसके अलावा बाकी 3 मेंबर ऐसे होंगे जिन्होंने स्टेट या सेंट्रल यूनिवर्सिटी में कम से कम 5 सालों तक वाइस चांसलर के तौर पर काम किया हो। 

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