रिसर्च में फंडिंग तो बढ़ी, लेकिन छात्रों में जागरुकता की कमी

पिछले दो वर्षों के दौरान तकनीकी संस्थानों को रिसर्च के लिए मिलने वाली फंडिंग में इजाफा हुआ है।

एजुकेशन डेस्क। एक सर्वे में शामिल उच्च शिक्षण संस्थानों और इंडस्ट्री एक्सपर्ट ने माना है कि देश में रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने और संस्थानों व इंडस्ट्री के बीच आपसी तालमेल स्थापित करने में केंद्र सरकार को अहम भूमिका निभानी होगी। इसके लिए सरकार द्वारा कुछ प्रयास भी किए गए हैं। वहीं दूसरी तरफ छात्रों को अपने क्षेत्र से संबंधित रिसर्च के बारे में भी जानकारी नहीं होती है। 

तकनीकी संस्थानों के अनुसार रिसर्च को बढ़ावा देने में सरकार को निभानी होगी अहम भूमिका

- देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में रिसर्च को बढ़ावा देने के विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। कई शीर्ष संस्थान अपने स्तर पर भी इसके लिए प्रयास कर रहे हैं।
- हालांकि इसके बावजूद विभिन्न रिसर्च संस्थानों और इंडस्ट्री एक्सपर्ट का मानना है कि देश में रिसर्च
और इनोवेशन को बढ़ावा देने और संस्थानों व इंडस्ट्री के बीच आपसी तालमेल स्थापित करने में केंद्र सरकार को अहम भूमिका निभानी होगी।
- यह बात नैसकॉम और इंफोहोलिक द्वारा किए गए एक सर्वे में सामने आई है। देशभर के शीर्ष उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों और इंडस्ट्री एक्सपर्ट पर किए गए इस सर्वे में करीब 92 फीसदी ने माना कि रिसर्च की मौजूदा परिस्थितियों को बदलने में केंद्र सरकार की भूमिका अहम होगी। 

पिछले दो वर्षों में बढ़ी है फंडिंग

- रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो वर्षों के दौरान तकनीकी संस्थानों को रिसर्च के लिए मिलने वाली फंडिंग में इजाफा हुआ है। 2016 और 2017 के दौरान 39% संस्थानों को रिसर्च के लिए 5 करोड़ रुपए से ज्यादा की फंडिंग मिली है। हालांकि इस दौरान दो शीर्ष संस्थान आईआईटी खड़गपुर और एनआईटी त्रिची में रिसर्चप्रोजेक्ट में तो इजाफा देखने को मिला लेकिन इन संस्थानों को मिलने वाली फंडिंग कम हो गई।
- इसके अलावा इसमें यह भी बताया गया है संस्थानों द्वारा फाइल किए जाने वाले पेटेंट की संख्या में इजाफा हुआ है। अकेले आईआईटी दिल्ली ने अबतक 600 से ज्यादा पेटेंट फाइल किए हैं, जबकि आईआइटी मद्रास ने 2016-17 के दौरान ही 126 से पेटेंट दायर किए। सर्वे में शामिल संस्थानों का कहना था कि रिसर्च के लिए फंडिंग के साथ-साथ सही गाइडेंस की आवश्यकता होती है। 

एकेडमिक्स और इंडस्ट्री के बीच तालमेल जरूरी

- अधिकांश संस्थानों के अनुसार छात्रों को रिसर्च और इनोवेशन की ओर प्रोत्साहित करने के लिए एकेडमिक्स और इंडस्ट्री के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना जरूरी है।
- सर्वे में शामिल करीब 80% संस्थान और इंडस्ट्री एक्सपर्ट यही मानते हैं। एक्स्पर्ट का मानना है कि इससे छात्र आंत्रप्रेन्योरशिप के लिए भी प्रोत्साहित होंगे।
- हालांकि पिछले वर्ष सरकार द्वारा तकनीकी संस्थानों में शिक्षा का स्तर बेहतर बनाने के लिए इंडस्ट्री एक्सपर्ट की मदद से कॅरिकुलम तैयार करने और छात्रों को कम से कम तीन टर्नशिप अनिवार्य करने का निर्देश दिया था। 

रिसर्च के प्रति जागरूक नहीं हैं छात्र

- कुछ समय पहले जारी हुई एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि देशभर के शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले इंजीनियरिंग छात्रों को अपने विषय से संबंधित रिसर्च के बारे में जानकारी नहीं होती है और न ही वे इसे लेकर ज्यादा जागरूक हैं।
- रिपोर्ट के अनुसार 81% इंजीनियरिंग छात्रों को अपने क्षेत्र से संबंधित बड़ी रिसर्च के बारे में कोई जानकारी नहीं होती है।
- हालांकि शीर्ष ग्रेजुएट्स की भी यही हालत है। प्रत्येक 10 में से तीन से भी कम शीर्ष ग्रेजुएट्स को ही अपने क्षेत्र या विषय से संबंधित किसी इंटरनेशनल जर्नल के बारे में पता है।

खर्च में सरकार की भागीदारी हुई कम

- पिछले कई वर्षों से रिसर्च में खर्च के मामले में सरकार की भागीदारी में कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार 2004-05 में रिसर्च में सरकार की करीब 70% और बिज़नेस की 30% हिस्सेदारी थी।
- 2014-15 में सरकार की भागीदारी घटकर सिर्फ 56.4% रह गई। वहीं रिसर्च में किए जाने वाले खर्च में बिज़नेस सेक्टर की हिस्सेदारी बढ़कर 44% के करीब पहुंच गई।


 

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