रिजल्ट बिगड़े या अच्छा रहे, पैरेंट्स की होती हैं ये जिम्मेदारी

रिजल्ट का समय स्टूडेंट्स के साथ-साथ पैरेंट्स के लिए भी स्ट्रेसफुल रहता है।

एजुकेशन डेस्क। बोर्ड एग्जाम और हायर एजुकेशन के लिए होने वाले एंट्रेस एग्जाम के रिजल्ट आने का दौर अब शुरू हो गया है। जेईई मेंस से रिजल्ट की शुरुआत हो चुकी है। रिजल्ट खराब होने, पैरेंट्स के प्रेशर, डांट या डिप्रेशन में स्टूडेंट कई बार गलत कदम उठा लेते हैं। ऐसे में bhaskareducation.com ने साइकोलॉजिस्ट और काउंसलर से बात कर ये जानने की कोशिश की कि इस समय बच्चों को नॉर्मल रखने के लिए पैरेंट्स को क्या करना चाहिए और क्या नहीं।

प्रेशर देने की बजाय बच्चे की चॉइस पर दें ध्यान

- साइकोलॉजिस्ट और काउंसलर्स के अनुसार, ये समय न सिर्फ स्टूडेंट्स बल्कि पैरेंट्स के लिए भी स्ट्रेसफुल रहता है। रिजल्ट कैसा आएगा, पसंदीदा इंस्टीट्यूट में एडमिशन मिलेगा या नहीं, घरवालों का क्या रिएक्शन होगा जैसे कई सवाल स्टूडेंट्स को परेशान करते हैं। ऐसे में कई बच्चे डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं तो कई स्टूडेंट्स खराब रिजल्ट के डर में सुसाइड जैसा कदम उठा लेते हैं। 
- इस समय पैरेंट्स को जिम्मेदारी समझते हुए बच्चों को पॉजिटिव माहौल देना चाहिए। बच्चे के साथ बेहतर कम्युनिकेशन ही एकमात्र उपाय है, जो उन्हें डिप्रेशन से दूर रख सकता है। बच्चे से जरूरत से ज्यादा उम्मीद न रखें। प्रेशर डालने के बजाय बच्चे की चॉइस को ध्यान में रखकर करियर सलेक्शन में उनकी हेल्प करें। 

ऐसे पहचानें बच्चे का बिहेवियर 

- साइकोलॉजिस्ट काउंसलर डॉ. रुचिता पांडेय के अनुसार, रिजल्ट अाने से पहले बच्चे फैमिली से दूरी बनाना शुरू कर देते हैं। खाने-पीने में इंट्रेस्ट कम हो जाता है। अगर आपके बच्चे में ये बातें दिखाई दें तो उस पर नजर रखें, लेकिन जासूस बनकर नहीं। उससे फ्रेंडली बिहेव रखें और उन लोगों के एग्जामपल दें, जो फेल होने के बाद भी अच्छे मुकाम पर हैं। 
- डॉ. रुचिता ने बताया कि बच्चे बिहेव से पता कर सकते हैं कि उसके दिमाग में क्या चल रहा है। जो बच्चे इमोशनली टूट चुके हैं, वही सुसाइड के बारे में सोचते हैं। इसलिए पैरेंट्स उनसे बात करें और उन्हें पूरा समय दें। 

रिजल्ट बिगड़ने पर करें मोटिवेट 

- बच्चे का पेपर बिगड़ने या रिजल्ट खराब आने पर पैरेंट्स की भूमिका बढ़ जाती है। इस परिस्थिति में उन्हें सिर्फ मोटिवेशन की जरूरत होती है, जो पैरेंट्स के अलावा कोई नहीं दे सकता है। जब ऐसा हो तो हताश होने के बजाय बच्चे को अगली बार के लिए अच्छी तैयारी के लिए प्रेरित करें। रिजल्ट की चिंता में स्ट्रेस न लेने की सलाह दें, उन्हें खुश रखने की कोशिश करें। 

एग्जाम तय नहीं करता फ्यूचर 

- करियर काउंसलर डॉ. अजीत वरवंडकर का कहना है कि कोई भी एंट्रेस एग्जाम किसी बच्चे की काबिलियत तय नहीं करता। 2014 में जेईई टॉपर ने मुंबई, आईआईटी में एडमिशन लिया। 6 महीने बाद उसे महसूस हुआ कि उसे इंजीनियरिंग नहीं, बल्कि रिसर्च में जाना चाहिए। 22 साल पहले एक बच्चा मेडिकल एंट्रेस एग्जाम क्लीयर नहीं कर सका था, आज वो शख्स आईआईटी बोर्ड मेंबर है। ऐसे कई उदाहरण हैं, जो ये साबित करते हैं कि किसी एक एग्जाम में फेल या पास होने से काबिलियत या फ्यूचर तय नहीं किया जा सकता। 

इसी महीने जारी होंगे ये रिजल्ट 

- आईसीएसई 12वीं : 24 मई संभावित 
- आईसीएसई 10वीं : मई के चौथे सप्ताह 
- सीबीएसई 12वीं : मई के आखिरी सप्ताह 
- सीबीएसई 10वीं : मई के आखिरी सप्ताह 
- सीजी बोर्ड 10वीं : 7 से 10 मई के बीच 
- सीजी बोर्ड 12वीं : मई के दूसरे सप्ताह में 
- जेईई एडवांस के अलावा नीट और एम्स सहित कई एंट्रेंस टेस्ट का रिजल्ट अगले दो महीनों में जारी किया जाएगा। 

सेकेंड ऑप्शन जरूर डिसाइड करें स्टूडेंट 

- किसी एंट्रेस एग्जाम में एक बार असफल होने पर दोबारा ट्राय करें, लेकिन सेकेंड ऑप्शन जरूर सोचें। अगर टारगेट आईआईटी में एडमिशन लेने का है और वो ना हो पाए तो अपनी तैयारी ऐसी रखें ताकि एनआईटी में एडमिशन मिल सके। 

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