ड्यूअल डिग्री प्रोग्राम से खुद को बनाएं दूसरों से अलग,बारहवीं के बाद ही ले सकते हैं एडमिशन 

यूजीसी ने कुछ साल पहले स्टूडेंट्स को अपने नॉलेज, स्किल और एम्प्लॉयबिलिटी को सुधारने के लिए देश भर के कॉलेज और यूनिवर्सिटीज में डबल डिग्री या ड्यूअल कोर्स को मंजूूरी दी थी।

करियर डेस्क । यूजीसी ने कुछ साल पहले स्टूडेंट्स को अपने नॉलेज, स्किल और एम्प्लॉयबिलिटी को सुधारने के लिए देश भर के कॉलेज और यूनिवर्सिटीज में डबल डिग्री या ड्यूअल कोर्स को मंजूूरी दी थी। मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2017 में प्रोफेशनल व वोकेशनल कोर्स में दाखिला लेने वाले लगभग 4.3 लाख स्टूडेंट्स में से 38 हजार से ज्यादा ने ड्‍यूअल डिग्री कोर्स में दाखिला लिया। इन कोर्सेज के माध्यम से स्टूडेंट्स एक ही कॉलेज से दो विषय एक साथ पढ़ सकते हैं। मसलन साइंस में 12वीं के बाद बीटेक और एमबीए कोर्सकिया जा सकता है।

डबल हैं फायदे 
ये कोर्स 6 साल की बजाय 5 साल में पूरे हो जाते हैं जिससे आपका एक साल बच जाता है। वहीं दो स्ट्रीम्स में एक साथ पढ़ाई करने का खर्च भी काफी कम आता है। } एक ही सब्जेक्ट में ड्यूअल डिग्री कॅरिअर के अच्छे आॅप्शन देती है लेकिन इसे डाइवर्सिफाई करके स्टूडेंट्स खुद को जॉब रेडी बना सकते हैं व कॅरिअर ग्रोथ भी हासिल कर सकते हैं। 

क्यूं ले एडमिशन
आज के प्रतिस्पर्धी दौर में सिर्फ एक विशेषज्ञता कॅरिअर ग्रोथ की गारंटी नहीं है, खासकर कॉर्पोरेट सेक्टर और बड़ी इंडस्ट्रीज में। दरअसल यह ट्रेंड दुनियाभर में 2008 की आर्थिक मंदी के बाद शुरू हुआ। मंदी के अलावा जॉब मार्केट ट्रेंड्स की वजह से प्रोफेशनल्स ने इंडस्ट्री स्विच करके अपने कॅरिअर को सुरक्षित बनाना शुरू किया। ऐसे में 12वीं के बाद ही ड्यूअल सब्जेक्ट में डिग्री (जैसे इंजीनियरिंग के साथ मैनेजमेंट) और स्किल्स हासिल करना एक उपयोगी विकल्प के रूप में सामने आया क्योंकि नियोक्ता मल्टीटास्कर्स को हायर करने में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं। यही वजह है कि एक से ज्यादा सब्जेक्ट्स की नॉलेज रखने वाले युवाओं को कॉर्पोरेट क्षेत्र में आसानी से एंट्री मिल जाती है। साथ ही रिक्रूटर्स को कम खर्च में विशेषज्ञता वाले कर्मचारी मिल जाते हैं। इसी वजह से अब ड्यूअल डिग्री प्रोग्राम्स को काफी अहमियत दी जा रही है।

मिलेगें ज्यादा मौके
केवल एक सब्जेक्ट में डिग्री की तुलना में प्रोफेशनल कोर्स में ड्यूअल स्पेशलाइजेशन करने से कॅरिअर के ज्यादा अवसर िमल रहे हैं। मसलन अगर आपके पास पब्लिक रिलेशन्स के साथ डिजिटल मार्केटिंग में स्पेशलाइजेशन है तो दूसरों के मुकाबले आपको बेहतर मौके मिलते हैं। इसी तरह रिटेल एंड ई-कॉमर्स, हॉस्पिटैलिटी एंड हॉस्पिटल मैनेजमेंट, जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, एचआर एंड इंडस्ट्रियल रिलेशन्स और आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे ड्यूअल स्पेशलाइजेशन करने वालों को रिक्रूटर्स पसंद कर रहे हैं।

करनी होगी ज्यादा मेहनत
एक ही समय में दो मुश्किल विषयों का अध्ययन अपने आप में एक चुनौती है। ज्यादा वर्कलोड के चलते इसका काफी दबाव महसूस हो सकता है। 
इसके लिए स्टूडेंट में अत्यधिक उत्साह होने के अलावा दो अलग-अलग क्षेत्रों में पढ़ाई करने का साहस होना चाहिए। 
ड्यूअल डिग्री की पढ़ाई में दृढ़ता, समन्वय, कड़ी मेहनत और काफी सारी प्लानिंग की जरूरत होती है। ऐसे में इन कोर्सेज को करने वाले उम्मीदवारों को हमेशा मोटिवेटेड रहने के तरीके अपनाने चाहिए। 

प्रमुख ड्यूअल डिग्री प्रोग्राम 
बीबीए प्लस एमबीए, बीटेक प्लस एमटेक, बीटेक प्लस एमएस, बीटेक प्लस एमबीए, एमटेक प्लस पीएचडी, बीटेक (सीएस) प्लस एमएससी कम्प्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स बाय रिसर्च, बीटेक (सीएस) प्लस एमएससी कम्प्यूटेशनल नेचुरल साइंस बाय रिसर्च कुछ प्रमुख ड्यूअल कोर्स हैं।

प्रमुख संस्थान

आईआईटी, मुंबई
आईआईटी, खड़गपुर
बिट्स पिलानी
आईआईएम कोलकाता
गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, दिल्ली, 
आईआईआईटी हैदराबाद 
इसके अलावा डिस्टेंस मोड में भी ये कोर्स उपलब्ध हैं।


 

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