सर्टिफिकेट में नाम बदलवाने का कानून आसान बनाए CBSE: दिल्ली हाईकोर्ट

कोर्ट ने एक स्टूडेंट्स की याचिका पर सुनवाई करते हुए सीबीएसई को यह निर्देश दिया है। स्टूडेंट ने सिंगल बेंच के 6 सितंबर 2017 के आदेश के खिलाफ यह अपील दायर की थी।

नई दिल्ली । दिल्ली हाईकोर्ट ने स्कूल सर्टिफिकेट में गलत नाम होने के कारण होने वाली दिक्क्तों को गंभीर माना है। कोर्ट ने सीबीएसई को निर्देश दिया है कि नाम में बदलाव से जुड़े नियमों पर विचार कर उसे सरल बनाए। इस काम को पूरा करने के लिए कोर्ट ने बोर्ड को 6 महीने का वक्त ​दिया है।

हर सभी स्टूडेंट्स जागरूक नहीं

जस्टिस रविंद्र भट और जस्टिस एके चावला की बेंच ने कहा, 'भारत एक बड़ा देश है। एफीलिएटेड स्कूलों में आने वाले सभी स्टूडेंट्स ऐसे परिवारों से ताल्लुक नहीं रखते जो पूरी तरह जागरूक और शिक्षित हों। ऐसे स्टूडेंट्स सीबीएसई स्कूलों में अपनी इच्छा के आधार पर दाखिला लेते हैं, संभव है कि वे अपना नाम भी ठीक से लिखना नहीं जानते हों। जब तक स्टूडेंट को अपनी गलती समझ आती है, तब तक देर हो चुकी होती है।' 

एक स्टूडेंट ने दायर की थी अपील

नाम में बदलाव से जुड़े सीबीएसई कानूनों पर गौर करते हुए बेंच ने आगे कहा कि बाय लॉ की वजह से स्टूडेंट्स को परेशानी होती है, क्योंकि उनके दूसरे दस्तावेजों में भी गलत नाम आ जाता है। कई बार स्टूडेंट्स नाम में गड़बड़ी के कारण अच्छे मौके भी खो देते हैं। यह सब बाय लॉ 69.1(i) की वजह से है। एक नाबालिग बच्चे ने अपने पिता के जरिए अपील दायर की थी। माइग्रेशन सर्टिफिकेट में बच्चे के नाम में सुधार की मांग की गई थी। बच्चा गल्फ कंट्री के सीबीएसई स्कूल से केरल के सीबीएसई स्कूल में ट्रांसफर हो रहा था। सीबीएसई ने मांग ठुकरा दी थी और उसे बाय लॉ 69.1 (i) के खिलाफ बताया था। 

कोर्ट ने एक स्टूडेंट की अपील भी की मंजूर 

दिल्ली हाई कोर्ट ने 10वीं क्लास की मार्कशीट में अपने और अपने माता-पिता के नाम में सुधार की मांग करने वाली एक स्टूडेंट की अपील मंजूर कर ली और सीबीएसई को निर्देश दिया कि वह इस स्टूडेंट को नाम में सुधार के साथ नई मार्कशीट जारी करे। 

याचिका में बदलाव की मांग नहीं

जस्टिस रविंद्र भट और जस्टिस एके चावला की बेंच ने सीबीएसई को निर्देश दिया कि वह चार हफ्तों के भीतर याचिकाकर्ता और उसके पेरेंट के नामों में सुधार के साथ संशोधित ग्रेड शीट जारी करे। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता की सिर्फ यही मांग है कि सर्टिफिकेट में उनके नाम पूरे लिखे जाएं। बेंच ने कहा, याचिका में सिर्फ नामों में सुधार की मांग है, बदलाव की नहीं। 

जारी होगी दूसरी मार्कशीट

कोर्ट ने माना कि मौजूदा मामला बायलॉज 69.1(i) के दायरे में है जो नामों में सुधार से डील करता है। कोर्ट ने इस पर भी गौर किया। याचिकाकर्ता को सीबीएसई बोर्ड से 12वीं क्लास के एग्जाम देने हैं और जिसके बाद सीबीएसई उसे दूसरी मार्कशीट जारी करेगा। स्टूडेंट ने सिंगल बेंच के 6 सितंबर 2017 के आदेश के खिलाफ यह अपील दायर की थी। बेंच ने याचिकाकर्ता की सीबीएसई के रिकॉर्ड में 10वीं क्लास ग्रेड शीट में नामों में सुधार की मांग खारिज कर दी थी। 

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