खुशी का सीधा नाता प्रेम से : दलाई लामा की सफलता और खुशी पर इंस्पिरेशनल स्पीच

दलाई लामा ने 1 दिसंबर 2013 को बिरला इंस्टीट्यूट आॅफ मैनेजमेंट  टेक्नोलॉजी कॉलेज में सफलता और खुशी पर अपने विचार साझा किए। जिसने लोगों को प्रेरित किया।

एजुकेशन डेस्क । दलाई लामा विश्व शांति के लिए दुनिया के 50 से भी अधिक देशों का भ्रमण कर चुके हैं। जिसके लिए उन्हें शांति का नोबेल पुरुस्कार भी दिया जा चुका है। 2005 और 2008 में उन्हें विश्व के 100 महान हस्तियों की सूची में भी शामिल किया गया।  दलाई लामा ने 1 दिसंबर 2013 को बिरला इंस्टीट्यूट आॅफ मैनेजमेंट  टेक्नोलॉजी कॉलेज में सफलता और खुशी पर अपने विचार साझा किए। जिसने लोगों को प्रेरित किया। जानते हैं  उन्होंने अपने भाषण में क्या कहा....

यह मेरे लिए बड़े सम्मान की बात है कि मुझे आप जैसे भाइयों और बहनों के साथ अपने  विचार साझा करने का मौका मिला। मैं खुद को बस एक आम आदमी मानता हूं और हममें  कोई ख़ास अंतर नहीं है। मुझे याद है शायद वो 20 अप्रैल 1959 का दिन था जब मैं मसूरी   के बिड़ला हाउस पहुंचा था। कुछ समय बाद पंडित नेहरू मुझसे मिलने आए। मैं 1954 में  पहली बार उनसे पेकिंग में मिला था, और उसके बाद बुद्ध जयंती के अवसर पर 1956 में। उस समय तक तिब्बत में संकट आ चुका था और मैंने उनसे कहा कि मैं वापस जाने के बारे  में नहीं सोच रहा हूं। तब उन्होंने सलाह दी कि बेहतर होगा मैं वापस जाऊं। 

बिड़ला हाउस में रहते हुए अब तक लगभग 55 साल बीत चुके हैं। मैंने अपना घर खोया और  मुझे नया घर मिला भारत में, एक ऐसा देश जिसे अपनी स्टडीज की वजह से मैंने हमेशा अपने करीब महसूस किया है। भारत सरकार ने हमारा ख्याल रखा। मैं एक शरणार्थी हूं, लेकिन मैं भारत सरकार का सबसे लम्बे समय तक ठहरने वाला अतिथि भी हूं, भारत की  मदद और यहां मिलने वाली स्वतंत्रता की वजह से मैंने बहुत सी चीजें सीखी हैं, उनमें से  एक है प्राचीन भारत का विचार – अहिंसा। 

ज़रूरी नहीं कि किसी के एक्शन से अहिंसा का पता लगाया जाए, बल्कि उस काम के पीछे  के मोटीवेशन से अहिंसा का पता लगाया जा सकता है। यदि हम किसी को धोखा देना चाहते  हैं और उससे कुछ फायदा उठाना चाहते हैं और इसलिए हम उससे मुस्कुरा कर बात करते  हैं, मीठे बोल बोलते हैं, कोई तोहफा देते हैं तो यह एक तरह की हिंसा है, क्योंकि इसमें  निगेटिव इमोशन इनवॉल्व्ड है। वहीं दूसरी तरफ यदि किसी कि भलाई के लिए हम कठोर शब्द  इस्तेमाल करते हैं तो ये अहिंसा है, क्योंकि इसमें पॉजिटिव इमोशन इनवॉल्व्ड है। 

भारत में भ्रष्टाचार बहुत फैला हुआ है और यह काफी गंभीर समस्या है और छल-कपट की  तरह ये भी एक तरह की हिंसा है। शांतिपूर्ण, नॉन वॉयलेंट एक्शन से सम्बंधित है; जो  कुछ ऐसा है जिसे सेक्युलेरिज्म के आधार पर बढ़ावा देने की जरुरत है क्योंकि भारत एक मल्टीरिलीजियस सोसायटी है, स्वतंत्रता सेनानियों ने सोचा कि एक धर्मनिरपेक्ष संविधान होना चाहिए। एक धर्म को दूसरे पर थोपना काम नहीं करता, वहीं भारत के दृष्टिकोण से  धर्मनिरपेक्षता सभी दहरमो का सम्मान करती है और यहां तक कि नास्तिक होने के अधिकार  का भी। 

मैंने पढ़ा है कि आज 7 अरब लोगों में से कम से कम 1 अरब खुद को नास्तिक मानते हैं।लेकिन बचे हुए 6 अरब लोग, जिनमें शायद कुछ यकीन बाकी है, उनमें से बहुत से बस  ऊपर-ऊपर से ऐसा मानते हैं। जब तक आप अपनी धार्मिक गतिविधियों के प्रति गंभीर और   ईमानदार नहीं हैं, तब तक पाखंड का बहुत बड़ा खतरा है। दरअसल, यदि नैतिक मूल्यों की  कमी हो तो धर्म को बड़ी आसानी से लोगों का फयदा उठाने और हेर-फेर करने के लिए प्रयोग किया जा सकता है। 1973 में मेरी पहली यूरोप यात्रा के समय से मैंने समझा है कि  हम एक वैश्विक जिम्मेदारी की समझ विकसित करने की ज़रुरत है, जो पूरी मानवता के प्रति  हमारा ध्यान खींचता हो।

कोई भी प्रॉब्लम नहीं चाहता, लेकिन हम खुद उसे पैदा करते हैं, वो हमारे आत्म-केंद्रित एटीट्यूड की वजह से पैदा होती हैं। इसके उलट, करुणा और दूसरों के प्रति लगाव एक  पीसफुल संसार बनाने के लिए की—फैक्टर हैं। यदि हमारे करुणा का आधार धार्मिक विश्वास  है तो वो एक सीमा में बंध जाएगा। इसकी जगह यदि हम धर्मनिरपेक्ष तरीके से काम करते हैं तो  जो हम हासिल कर सकते हैं उसकी कोई सीमा नहीं है। 

हमें अपने अनुभवों के बारे में चिंतन करना चाहिए। हमारी मां से हमारा जन्म और वो प्रेम  जिससे वो हमारा ख्याल रखती है, हमें दूसरों के प्रति प्रेमपूर्ण होने की क्षमता देता है। 

अपने खुद के अनुभव से मैं बता सकता हूं कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए मन की  शांति प्रभावशाली है। वैज्ञानिक, धर्मनिरपेक्षता के दृष्टिकोण से मेडिटेट करने से करुणा के प्रति होने  वाले लाभ को दो से तीन हफ़्तों तक किए जा रहे प्रयोगों द्वारा माप के जांच रहे हैं। उन्हें लो—ब्लड प्रेशर, कम स्ट्रेस और दूसरों से बेहतर इंटरएक्शन के परिणाम मिले हैं। इसलिए,सफलता और ख़ुशी का सीधा नाता एक प्रेम में डूबे शांत दिमाग को विकसित करने से है। यदि हम   आंतरिक मूल्यों की तरफ ध्यान दें तो ज़िन्दगी खुशहाल हो सकती है। प्राब्ल्म्स होंगी, लेकिन  जरूरी बात ये है कि हम उनको कैसे अप्रोच करते हैं। 

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