CLAT 2018: मैथ्स टफ, फिर भी पेपर आसान, 135 जा सकता है कटऑफ

इस बार 19 नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज में 2500 सीट्स पर मिलेगा प्रवेश, देश में 63 एग्जाम सेंटर्स बनाए गए थे।

एजुकेशन डेस्क।  देश की 19 नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज में एडमिशन के लिए रविवार को कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट क्लैट 2018 का आयोजन किया गया। इस बार कैट का पेपर पिछले साल की तुलना में आसान आया, जिसकी वजह से लॉ यूनिवर्सिटीज में एडमिशन के लिए इस बार कटऑफ हाई रहने वाला है। पेपर का एनालिसिस देखें तो मैथमेटिक्स का हिस्सा लेंदी होने के कारण, इस सेक्शन को पहले ऑप्ट करने वाले स्टूडेंट्स का टाइम काफी वेस्ट हुआ, लेकिन ओवरऑल पेपर आसान होने के कारण, स्कोर इस बार हाई होने वाला है। इस बार क्लेट कोच्चि की नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ एडवांस्ड लीगल स्टडीज की ओर से आयोजित करवाई गई।

हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर प्रॉब्लम से स्टूडेंट्स हुए परेशान 

- इस बार देशभर के एग्जाम सेंटर्स पर स्टूडेंट्स को हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर से जुड़ी प्रॉब्लम्स फेस करनी पड़ी। बार-बार स्क्रीन का ऑफ होना और सिस्टम का हैंग हो जाना, जैसी प्रॉब्लम्स ने स्टूडेंट्स को परेशान किया। वहीं इनविजिलेटर्स के नॉन-प्रोफेशनल बिहेवियर के कारण भी स्टूडेंट्स को काफी परेशानी हुई। रफ पेपर देने में प्रॉब्लम क्रिएट करना, एग्जाम शुरू होने के बाद सिग्नेचर लेने और आईडी कार्ड चेक करने जैसे डिस्टर्बेन्स ने स्टूडेंट्स को परेशान किया। 
- कुछ सेंटर्स पर कंप्यूटर हैंग होने की वजह से स्टूडेंट्स का खराब हुआ।  स्टूडेंट्स को 12 मिनट का वक्त कम्प्यूटर हैंग होने से खराब हुआ। कुछ सेंटर्स पर पेपर में 12 मिनट बाद सवाल दिखने शुरू हुए इससे स्टूडेंट्स को एक घंटा 48 मिनट में पेपर सॉल्व करना पड़ा। तकनीकी समस्याओं के चलते कई सेंटर्स में कम्प्यूटर हैंग हो गए ।
- हैंग होने का सिलसिला पूरे पेपर के दौरान चलता रहा ऐसे में स्टूडेंट्स पेपर सॉल्व करने पर फोकस नहीं कर पाए। स्क्रीन बार-बार फ्रीज हो रही थी। स्टूडेंट्स ने अपनी ओर से इसकी शिकायत भी की, पर कोई फायदा नहीं हुआ।

इतना रह सकता है कटऑफ

- इस साल देश की टॉप 3 लॉ यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए कटऑफ 132 से 135 के आसपास रहने की उम्मीद है।

एक्सपर्ट्स ने बताया, ऐसा रहा पेपर

- क्लैट प्रिपरेशन एक्सपर्ट हर्ष गंगरानी ने बताया, 2016 से तुलना करें, तो पेपर थोड़ा सा मुश्किल कहा जा सकता है। पिछले साल यानी 2017 के क्लैट के पेपर को देखें, तो इस बार का पेपर काफी आसान था। इंग्लिश का पोर्शन बेसिक ग्रामर पर केन्द्रित रहा, जबकि जीके के पोर्शन में अधिकतर सवाल करेंट अफेयर्स से पूछे गए। जीके के स्टेटिक्स से जुड़े सवाल भी करेंट अफेयर्स पर ही आधारित थे।
- लीगल का हिस्सा सबसे आसान रहा, जिसमें करीब 35 से 38 सवाल लीगल रीजनिंग से जुड़े पूछे गए, जबकि 12 से 15 सवाल टिपिकल लीगल नॉलेज से जुड़े हुए थे। लॉजिकल रीजनिंग में भी इस बार पजल्स बेस्ड सवाल ही आए और मैथमेटिक्स का पोर्शन थोड़ा उलझाने वाला था। मैथमेटिक्स का पोर्शन लंबा था, जिसके कारण उन स्टूडेंट्स के पास टाइम कम बचा, जिन्होंने मैथ्स पोर्शन को पहले सॉल्व करने की कोशिश की। 
- स्टूडेंट्स को दो घंटे में 200 सवाल करने थे। स्टेटिक जीके के अनकंवेंशनल क्वेश्चन थे। मैथ्स काफी टफ रही, इसमें टाइम कंज्यूमिंग क्वेश्चन काफी ज्यादा रहे। रीजनिंग में नॉन वर्बल का वेटेज ज्यादा रहा, वहीं लीगल आसान रही। इंग्लिश की बात करें तो ओवरऑल ठीक रही। लीगल एप्टीट्यूड का सेक्शन मॉडरेट रहा। एक्सपर्ट के अनुसार, कटऑफ लास्ट ईयर से कम जाएगी। 
- लॉजिकल रीजनिंग में भी इस बार पजल्स बेस्ड सवाल ही आए। 200 मार्क्स की इस परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग है और गलत आंसर पर 0.25 अंक काटा जाएगा।
- क्लेट एक्सपर्ट सागर जोशी के अनुसार  इंग्लिश बेसिक ग्रामर पर केंद्रित रही तो जीके पूरी तरह करंट अफेयर्स पर आधारित रहा। परीक्षा में लीगल एप्टीट्यूट के 50, सामान्य ज्ञान के 50, अंग्रेजी के 40, मैथ्स के 20 व रीजनिंग के 40 सवाल पूछे गए। लीगल का हिस्सा सबसे आसान रहा।

 

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