अपने मज़बूत और कमज़ोर पक्ष को समझें तो सफलता दूर नहीं : निशांत जैन

निशांत जैन ने जॉब करते हुए सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की है। उनका कहना है कि बेहतर टाइम मैनेजमेंट के लिए जरूरी है कि अपनी खूबियों और खामियों को समझकर रणनीति बनाएं। 

एजुकेशन डेस्क । संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित 2014 की सिविल सेवा परीक्षा में निशांत जैन ने हिंदी माध्यम से सर्वोच्च रैंक हासिल की है। निशांत जैन का 13वीं रैंक हासिल करना हिंदी भाषी क्षेत्र के लिए गौरव और आत्मविश्वास का उदाहरण है। निशांत की सफलता से एक बात और सीखी जा सकती है कि इन्होंने इसकी तैयारी नौकरी करते हुए की। वे पिछले कुछ समय से लोकसभा में संपादकीय तथा अनुवाद सेवा में सहायक के रूप में काम कर रहे थे। निशांत से बातचीत के प्रमुख अंश-

सवाल: क्या इस परीक्षा में सफल होना ही आपके जीवन का लक्ष्य था? यदि नहीं, तो आगे आपकी निगाहें किन उद्देश्यों पर लगी हैं?

जवाब : इसमें कोई संदेह नहीं है कि सिविल सेवा में सफल होना मेरा लक्ष्य था, पर मेरे जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य मात्र यह नहीं है। मैं देश और समाज के लिए हमेशा से बेहतर योगदान करना चाहता था, विशेषकर बेटियों और वरिष्ठ नागरिकों के लिये। साथ ही, मौका मिलने पर मैं शिक्षा, संस्कृति, कल्याण और सूचना-प्रसारण जैसे क्षेत्रों में काम करना पसंद करूंगा।

सवाल : कहते हैं कि 1—2 साल तक तक कठोर मेहनत करने के बाद भी इस परीक्षा की तैयारी संतोषजनक तरीके से पूरी नहीं हो पाती। क्या यह सच है? 
जवाब :
मुझे लगता है कि एक-डेढ़ वर्ष की मेहनत काफी है। इस परीक्षा के लिये खास किस्म की 'मैच्योरिटी’ चाहिये, जो कम उम्र में भी अर्जित की जा सकती है और बहुत अनुभव के बाद भी। इस परीक्षा की तैयारी के लिये ज़रूरी है दबावमुक्त और सहज रहना। यही मेरा सबसे बड़ा हथियार रहा है। मुझे सफलता की आशा थी।

सवाल: आपका वैकल्पिक विषय क्या था? क्या इसकी पढ़ाई आपने स्नातक या आगे के स्तर पर की थी? 
जवाब: हिंदी साहित्य मेरा वैकल्पिक विषय रहा है। यह विषय मेरा एम.ए. और एम.फिल. का विषय होने के साथ-साथ मेरे दिल के बहुत करीब भी है। भाषा-साहित्य-संस्कृति और दर्शन का अद्भुत समन्वय यह वैकल्पिक विषय प्रदान करता है।

सवाल: कई लोग कहते हैं कि कुछ वैकल्पिक विषय दूसरे विषयों की तुलना में छोटे, आसान  अधिक अंकदायी होते हैं आपकी राय में क्या यह बात ठीक है?
जवाब:
हां, कभी-कभी ऐसा होता है। अभ्यर्थियों को किसी विषय के अंकदायी या छोटे होने को नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए। अपने वैकल्पिक विषय के चयन में मुझे कोई विचार नहीं करना पड़ा। यह मेरी पृष्ठभूमि से जुड़ा विषय भी था। साथ ही, अंकदायी होने के साथ-साथ इसमें बेहतर मार्गदर्शन भी उपलब्ध था।

सवाल: सामान्य अध्ययन के लिए कौन-सी पुस्तकें, पत्र-पत्रिकाएं पढ़नी चाहिए? 

जवाब: सामान्य अध्ययन के लिये आधुनिक भारत का इतिहास- स्पेक्ट्रम, राजव्यवस्था- लक्ष्मीकांत, भूगोल एवं पर्यावरण- NCERT, आंतरिक सुरक्षा- अशोक कुमार व विपुल, संस्कृति- पुष्पा बिष्ट सिन्हा। इन सबके साथ-साथ सरकारी वेबसाइटों, रेडियो और अखबारों की मदद लेते रहें। 

सवाल: तैयारी के दौरान समय प्रबंधन एक गंभीर चुनौती है। इसका हल आपने कैसे निकाला?
जवाब :
समय प्रबंधन मेरे लिये बड़ी चुनौती थी। सेवारत होने के कारण मैं प्रतिदिन शाम को और वीकेंड पर पढ़ाई करता था। मुझे लगता है कि अगर हम अपने मज़बूत पक्षों और कमज़ोरियों को समझते हुए प्राथमिकताएं तय कर लें तो समय प्रबंधन इतना भी मुश्किल नहीं है।

सवाल: सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू करने के लिये सबसे उपयुक्त समय क्या है? आपने तैयारी कब शुरू कर दी थी?
जवाब:
ग्रेजुएशन के तुरंत बाद तैयारी शुरू करना सर्वश्रेष्ठ विकल्प है। मैंने इस सेवा के लिये तैयारी एम.ए. के बाद शुरू की। हालांकि यह एक बहुत सब्जेक्टिव सवाल है। सबकी सफलता की अलग-अलग रणनीतियां हो सकती हैं। इस बात का ज्य़ादा तनाव न लें।

सवाल: प्रारंभिक परीक्षा एवं मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के विस्तृत पाठ्यक्रम को देखते हुए इसकी तैयारी के लिये आपने क्या रणनीति अपनाई?
जवाब :
मैंने प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा की एकीकृत व समन्वित तैयारी की। एक परीक्षा के लिये किया गया अध्ययन दूसरी परीक्षाओं में भी काम ही आता है; पर मेरी सलाह है कि प्रत्येक परीक्षा से ठीक पहले के कम से कम दो महीने उसी पर फोकस करें।

सवाल: अधिकांश सफल उम्मीदवार बताते हैं कि मुख्य परीक्षा में सफलता का एक बड़ा आधार उत्कृष्ट उत्तर लेखन शैली में छिपा है। आपने इसके विकास के लिये क्या तरीका अपनाया?
जवाब:
मेरा मत कमोबेश यही है। उत्तर लेखन शैली की नींव पर ही मुख्य परीक्षा की सफलता टिकी है। उत्तर की समग्रता के सभी पक्षों को बांधना और सम्प्रेषणीय ढंग से पिरोना बेहद ज़रूरी है। संतुलित दृष्टिकोण और टू-द-पॉइंट उत्तर बेहतर लेखन शैली की पहचान है।

सवाल: साक्षात्कार की तैयारी कैसे की? क्या तैयारी सचमुच साक्षात्कार में मदद करती है? 
जवाब:
साक्षात्कार की तैयारी करना हमेशा एक बेहतर व सुरक्षित विकल्प है। यूं तो व्यक्तित्व को कुछ हफ्तों में निखारना असंभव है, पर उसे कुछ हद तक मांजा जा सकता है। मेरी समझ में कुछ मॉक इंटरव्यू देना हमें अपनी कमज़ोरियों को समझने में मदद करता है।

सवाल : तैयारी के दौरान होने वाले मानसिक तनावों से कैसे उबरा जाए? आप इसके लिये क्या युक्ति अपनाते थे?
जवाब :
मैं एक आस्थावान व्यक्ति हूं, अतः मैं बस कर्म करता था और फल प्रकृति पर छोड़ देता था। साथ ही अपने परिवार, दोस्तों और रिश्तों को महत्त्व देना भी मानसिक तनावों से उबरने का बेहतर उपाय है।


साभार: दृष्टि आईएएस


 

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