बदलाव करियर के लिए ऑक्सीजन की तरह काम करता है

पेशेवर जिंदगी में आप खुद को उस जगह पर देख सकते हैं जहां आपने कल्पना की थी, लेकिन आपको बदलावों के साथ सहज होना होगा।

एजुकेशन डेस्क। चाहे आप प्रमोशन के लिए काम कर रहे हों या फिर कुछ नया सीखने के लिए नौकरी बदलना चाहते हों, हर करियर में बदलाव की जरूरत होती है। कॅरिअर विशेषज्ञ भी मानते हैं, जिन लोगों में हमेशा कुछ नया या अलग करने की लालसा होती है और जो बदलाव के साथ सामंजस्य बिठा लेते हैं उनकी तरक्की की स्पीड कई गुना तेज होती है। टू मिनट्स फ्रॉम दी एबिस : 11 पिलर्स ऑफ लाइफ मैनेजमेंट के लेखक विजय एसवारन के मुताबिक जितना ज्यादा आप बदलाव का स्वागत करते हैं उतना ही वह आपकी जिंदगी का हिस्सा बनता चला जाता है। दरअसल बदलाव में एक वाइब्रेशनल इफेक्ट होता है। हर बदलाव के साथ आप एक नए व्यक्ति के रूप में तब्दील होते हैं और दूसरे लोग आपसे ऊर्जा लेते हैं। सकारात्मक ऊर्जा से सकारात्मक लोग आकर्षित होते हैं और आपके लिए तरक्की आसान होती है। हालांकि हो सकता है कि कुछ बदलाव आपके लिए उम्मीद के अनुरूप फायदेमंद न हों लेकिन परिवर्तन को रोके रखना तो हर लिहाज से नुकसानदायक है। ऐसे में बदलाव के साथ सामंजस्य बिठाना आपके लिए कामयाबी के रास्ते खोल सकता है। 


लगाव मत पालिए 

- अगर आप बदलाव और संभावनाओं को दिल से अपनाना चाहते हैं तो आपको कामों को करने के आरामदायक तरीकों से निजात पानी होगी। नेक्स्ट इज नाउ : 5 स्टेप्स फॉर एंब्रेसिंग चेंज - बिल्डिंग ए बिजनेस दैट थ्राइव्स इंटू दी फ्यूचर के लेखक लिओर अरुसि के मुताबिक हम अपना करियर ऊंची आशाओं और उम्मीदों के साथ शुरू करते हैं और दुनिया को जीत लेना चाहते हैं। लेकिन अंतत: होता यह है कि हम काम की किसी प्रक्रिया या रोल या अपनी किसी स्किल के साथ सहज हो जाते हैं।
- ऐसा करना हमें प्रोसेस ऑपरेटर की भूमिका में ला देता है। क्योंकि इस स्थिति में हम उन कामों या स्किल पर ही रुक जाते हैं जिनके साथ हम सहज हैं। साथ ही कामों को अलग-अलग ढंग से करने में भी अनिच्छुक रहते हैं। बस इसी पॉइंट पर आकर संभावनाओं के दरवाजे आपके लिए बंद हो जाते हैं और उन्नति रुक जाती है। 


मकसद की स्पष्टता 

- फोर्डहम यूनिवर्सिटी के गैबेली स्कूल ऑफ बिजनेस में क्लीनिकल असिस्टेंट जूलिटा हैबर के मुताबिक चाहे आप अपने करियर में बदलाव अपनी इच्छा से लाएं या किसी परिस्थिति (जैसे कंपनी में छंटनी पर जॉब चेंज) के कारण, आपको अपने मकसद के परिणाम के बारे में स्पष्ट रहना होगा। आपको यह देखना होगा कि आप कहां पहुंचना चाहते हैं और यह आपकी कोर वैल्यूज से कैसे मेल खाता है।
- जिस तरह संस्थान अपनी चेंज मैनेजमेंट स्ट्रैटजीज को अपने गोल्स के साथ मिलाकर चलते हैं उसी तरह आपको भी अपने करियर गोल्स के बारे में पता होना चाहिए और यह भी मालूम होना चाहिए कि बदलाव किस तरह आपको अपने लक्ष्यों को हासिल करने में मदद देगा। इस स्पष्टता के बाद आपकी आगे की राह आसान हो जाएगी। 

 

काम की तकनीक 

- हैबर की सलाह है कि कॉन्शियस व सबकॉन्शियस लेवल पर किसी भी आउटकम के सकारात्मक रूप को अपनाएं। कॉन्शियस लेवल पर सकारात्मक रवैया अपनाएं और दूसरों के साथ संवाद करते हुए बदलाव का सामना करें। अपनी ताकतों पर जोर दें, डर का मुकाबला करें और बदलाव के साझीदार बनें। इसी तरह सबकॉन्शियस लेवल पर अपने दिमाग की प्रोग्रामिंग करें।
- इसके लिए जो भी परिणाम आप चाहते हैं उसे विजुअलाइज करें और ऐसे बर्ताव करें मानो वह बदलाव हो ही गया हो। उदाहरण के तौर पर अगर आपके बॉस बदलने वाले हैं तो सोचिए कि नए सुपरवाइजर से आप कैसे बर्ताव की उम्मीद कर रहे हैं। आप अपनी कैसी इमेज उनकी नजरों में देखना चाहते हैं। अब इसकी प्रैक्टिस भी शुरू करें। कॉन्शियस व सबकॉन्शियस प्रोग्रामिंग का मिश्रण विपरीतता के प्रभाव को कम करता है। 

 

नहीं बदलने की जिद है, पहली चुनौती 

- बदलाव के इस मैनेजमेंट में जो सबसे पहले चुनौती आती है वह है नए टूल्स या प्रोसेज को न अपनाने की प्रवृत्ति। लिओर के अनुसार, जब लोग बदलाव से डर जाते हैं तो अन्य अवसर देखना उनके लिए मुश्किल होता है। उदाहरण के तौर पर अगर आप बैंक में कैशियर हैं और इस काम से आपको बेहद लगाव है तो उस स्थिति की कल्पना कीजिए जब सारा काम ऑटोमेशन के जरिए होगा। यह तनाव खुदबखुद कुछ नया सीखने के लिए आपको प्रेरित करेगा।
- दरअसल आपके करियर में संतुष्टि या लगाव जिस तरह नई चीजों के लिए आपको अनिच्छुक बना देता है वह आपके भविष्य के लिए घातक हो सकता है। इससे आप नई चीजों को आजमाने से रुक जाते हैं। इसके बजाय आपको अपने जॉब के असल मकसद को समझना चाहिए।
- उदाहरण के तौर पर अगर आप इंश्योरेंस सेक्टर में जॉब करते हैं और मानते हैं कि आपका मकसद किसी पॉलिसी विशेष के लिए काम करते रहना है तो यकीन मानिए आप इस प्रक्रिया से खुद को बाहर नहीं निकाल पाएंगे। इसके बजाए अगर आप सोचें कि क्या आप उन्हें उनके गोल्स तक पहुंचने में मदद कर रहे हैं तो संभवत: कामयाबी तक पहुंचने की राह आसान होगी।
- अगर आप अपनी जिम्मेदारियों को इस तरह पूरा करते हैं जिससे कंपनी को उसके गोल्स हासिल करने में मदद मिलती है तो इसका मतलब है कि आप बदलावों को अपनाने में फ्लेक्सीबल हैं इससे आपको कॅरिअर में भी मदद मिलेगी। 


छोटे बदलावों की प्रैक्टिस 

- विशेषज्ञों के मुताबिक किसी भी बदलाव के साथ सहज होने के लिए नियमित प्रैक्टिस करनी होगी। किसी नए टॉपिक का अध्ययन या कंफर्ट जोन से बाहर किसी अलग प्रोजेक्ट पर काम करने की प्रैक्टिस करें।
- काम पूरे होने पर खुद को रिवॉर्ड देना भी बदलाव के साथ सहज होने में मदद करेगा। सकारात्मक मजबूती और प्रोत्साहन से भी आप खुद को प्रेरित कर सकते हैं। 

 

परिवर्तन से तनाव होगा, लेकिन घबराइए मत 

- जब आप बदलाव की उम्मीद नकारात्मक रूप में करते हैं तो अनिश्चितता की भावना पैदा होती है। नकारात्मक परिणामों की कल्पना ही दिमाग में तनाव पैदा करती है। साथ ही हमारा दिमाग भी फेलियर के आंतरिक डर को अपनाता है। ऐसा अनजानी चीजों के प्रति असहजता से होता है। ऐसे में बदलाव के सकारात्मक परिणामों पर फोकस करना फिक्र को कम कर सकता है। 
 

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