CGBSE: 12वीं टॉपर ने कहा- मैं क्रिकेट में ही बनाऊंगा करियर

शिव ने 10वीं की परीक्षा में भी मेरिट में 8वीं रैंक प्राप्त की थी। उस समय उन्हें 96.45 प्रतिशत अंक मिले थे।

एजुकेशन डेस्क, रायपुर। छत्तीसगढ़ बोर्ड की 12वीं के एग्जाम में टॉप करने वाले शिवकुमार पांडे टॉपर से क्रिकेटर तक का सफर तय करना चाहते हैं। फिलहाल वो डिस्ट्रिक्ट लेवल पर क्रिकेट खेलते हैं और अपना करियर क्रिकेट में ही बनाना चाहते हैं। वंदना पब्लिक स्कूल सिमगा के छात्र शिवकुमार ने बोर्ड एग्जाम में 98.40% अंक प्राप्त किए हैं। अपनी इस सफलता का श्रेय शिवकुमार अपने माता-पिता, टीचर और प्रिंसिपल के साथ ही मामा को भी देते हैं। उनका कहना है कि इन सभी ने उनका पढ़ाई में खूब सहयोग किया और मेरिट में आने के लिए प्रेरित करते थे।

यह है 2018 के टॉप-3
पहला स्थान:  शिवकुमार
दूसरा स्थान:  संध्या कौशिक
तीसरा स्थान: शुभम गुप्ता और शुभम गंधर्व

स्कूल में जो भी पढ़ा, घर पर आकर रिवाइज किया-शिवकुमार

-शिवकुमार बताते हैं कि उन्होंने कभी घंटों के हिसाब से पढ़ाई नहीं की। स्कूल में जो भी पढ़ाया जाता, उसे घर आकर जरूर रिवाइज करते। यह क्रम पूरे साल भर चला। जो कोर्स परीक्षा के लिए तय था, उसी के अनुसार अंतिम समय में तैयारी की और पूरा फोकस किया।
- वो बताते हैं कि सब सब्जेक्ट पर बराबर ध्यान देता था, लेकिन मैथ्स, फिजिक्स, केमिस्ट्री पर खास फोकस रहा। हालांकि क्रिकेट के चलते उन्हें परीक्षा के दौरान कोचिंग भी करनी पड़ी। इसके बावजूद सफलता मिली। शिव ने 10वीं की परीक्षा में भी मेरिट में 8वीं रैंक प्राप्त की थी। उस समय उन्हें 96.45 प्रतिशत अंक मिले थे।

एग्जाम के लिए बनाई क्रिकेट से दूरी

-शिवकुमार ने बताते हैं कि क्रिकेट खेलता था तो पढ़ाई भी करता था। हालांकि परीक्षा से एक माह पहले क्रिकेट खेलना पूरी तरह से छोड़ दिया था। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में पढ़ाई की बहुत सुविधाएं नहीं है, लेकिन अब सरकारी स्कूल में भी पढ़ाई की अच्छी सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। छात्रों को इन सुविधाओं का लाभ उठाना चाहिए। उनका कहना है कि पढ़ाई अपनी जगह है, लेकिन मुझे तो क्रिकेटर ही बनना है। शिव के पिता एलआईसी के एजेंट हैं।

डॉक्टर बनकर ग्रामीण क्षेत्र में करनी है सेवा: संध्या

-12वीं की बोर्ड परीक्षा में दूसरी रैंक हासिल करने वाली संध्या कौशिक का सपना डॉक्टर बनने का है। मोहंती एमएचएस स्कूल बिलासपुर की छात्रा संध्या ने बोर्ड परीक्षा में 97.40 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। वो कहती हैं कि सेल्फ स्टडी, टाइम मैनेजमेंट कर परीक्षा में कामयाबी हासिल की।

रोजाना की 8 घंटे पढ़ाई

- संध्या बताती हैं कि वो सात से आठ घंटे पढ़ाई करती थीं। पहले से ही उन्होंने तय कर रखा था कि मेरिट में जगह बनानी है। इसके चलते शुरू से ही पढ़ाई में फोसक किया। इसके लिए पढ़ने को टाइम मैनेजमेंट का खास ध्यान रखा। सेल्फ स्टडी पर पूरा फोकस रहता। वो बताती हैं कि पढ़ाई के लिए उनके मम्मी और पापा ने हमेशा मोटिवेट किया।
-संध्या कहती हैं कि प्रदेश के कई स्थान आज भी बहुत पिछड़े हुए हैं। ग्रामीण इलाकों में मेडिकल फेसिलिटी तक नहीं है। प्रदेश के कई हिस्से नक्सल प्रभावित हैं। वहां पर स्थित और भी बदतर है। ग्रामीण छोटी-छोटी बीमारियों के भी उपचार नहीं करा पाते। जिसके कारण वो गंभीर हो जात है। इन सबको देखते हुए वो डॉक्टर बनकर इन इलाकों की सेवा करना चाहती हैं। संध्या के पिता पुलिस विभाग में हैं, जबकि मां हाउस वाइफ हैं।

रोजाना 5 घंटे की पढ़ाई की,विश्वास था मेरिट में आऊंगा: शुभम गुप्ता

-छत्तीसगढ़ बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में तीसरा स्थान पाने वाले शुभम गुप्ता आईएएस बनने का सपना देखते हैं। शुभम कहते हैं कि उनके लिए केमिस्ट्री सबसे टफ सब्जेक्ट था। खासकर उसके रिएक्शन और फॉर्मूले। जब उन्हें स्कूल में पढ़ाया जाता तो वो उसे लिख लेते और फिर घर आकर रिवाइज करते। इसके बाद फिर लिखकर देखते। स्कूल से जो भी सवाल मिलते उसका भी रिवीजन घर आकर करते थे।
- शुभम बताते हैं कि स्कूल से आने के बाद वो पांच घंटे पढ़ाई करते। उनको पहले से पता था कि मेरिट में आऊंगा। परीक्षा के दौरान अनसॉल्व्ड पेपर का भी सहारा लिया। उनकी बड़ी बहन जो खुद बीकॉम थर्ड ईयर की स्टूडेंट हैं, शुभम को हमेशा मोटिवेट करती रहती थीं।
-शुभम को यहां तक पहुंचाने में उनके टीचर के साथ ही पिता का भी बहुत बड़ा हाथ है। शुभम बताते हैं कि टीचर ने पूरी तरह से सपोर्ट किया। शुभम के पिता भिलाई की एक कंपनी में कर्मचारी हैं और मां हाउस वाइफ हैं।
- देश सेवा का जज्बा शुरू से है। देश की सेवा करना चाहता हूं। प्रधानमंत्री भी कहते हैं कि पढ़े-लिखे युवाओं का प्रशासन में आना जरूरी है। इसलिए मैं आईएएस बनने का सपना देखता हूं।

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