UPSC सक्सेस स्टोरी: अनुदीप से पहले 3 साल टॉप पर थीं गर्ल्स

ईरा सिंघल, टीना डाबी और नंदिनी केआर पिछले तीन साल में डिक्लेयर किए गए यूपीएससी रिजल्ट में टॉप पर रहीं। इस बार डुरीशेट्टी अनुदीप ने टॉप किया है।

एजुकेशन डेस्क। यूपीएससी 2017 के रिजल्ट्स ने जहां तीन साल से चली आ रही परम्परा को तोड़ा, वहीं अनुदीप के तौर पर मेल कैंडिडेट टॉपर के रूप में दिया। हालांकि इससे पहले 2014 से लेकर 2016 तक लगातार तीन साल देश के सबसे प्रॉमिनेन्ट एग्जाम में गर्ल्स ने ही टॉप किया था। फ्लैशबैक में पढ़िए तीनों सक्सेसफुल टॉपर्स की स्टोरी। 

तीन बार रेवेन्यू सर्विस मिली, उम्मीद नहीं छोड़ी चौथी बार में मिली आईएएस

2014 टॉपर -  ईरा सिंघल

ईरा ने 4th अटैम्प्ट में टॉप किया। टॉप करने के पहले ईरा तीन बार रेवेन्यू सर्विस के लिए सिलेक्ट हो चुकी थीं। स्कूल टाइम से ही ब्रिलियंट स्टूडेंट रहीं ईरा स्कूल में एक बार जो सुन लेती थीं, वह याद हो जाता था। एनएसआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग करने के बाद ईरा ने कभी  भी कोई एग्जाम कुछ साबित करने के लिए नहीं दिया। लोगों की हेल्प करने के उद्देश्य के साथ वे आईएएस सर्विस में आना चाहती थीं। स्कॉलियोसिस से पीड़ित ईरा हर एग्जाम के बाद अगले एग्जाम की स्ट्रेटेजी बनाती थीं। सिविल सर्विस के पहला अटैम्प्ट 2010 में दिया। 2011, 2013 में ईरा के मेडिकल कंडीशन के चलते उन्हें आईएफएस, आईपीएस के लिए नहीं चुनी गईं। इसलिए देश सेवा के लिए चौथी बार आईएएस के लिए एग्जाम दिया और सिलेक्ट हुईं। ट्रेवलिंग और नॉवेल्स का शौक है। ईरा को स्पेनिश, फ्रैंच, ईटालियन लैंग्वेज आती हैं। अपने मैसेज में ईरा कहती हैं कि एनालिसिस और स्मार्ट स्टडी से कोई भी यह एग्जाम क्लीयर कर सकता है। 

रिजल्ट से पहले नर्वस थी, नींद नहीं आई थी, दूसरे दिन बदल गई दुनिया 

2015 टॉपर- टीना डाबी

नॉवेल पढ़ने का शौक था। बचपन से ही रीडिंग हैबिट डेवलप हुई थी। मधुबनी पेंटिंग करने मां ने सजेस्ट किया था। डेली रूटीन में 24 घंटे पढ़ाई संभव नहीं हो पाती थी। लेकिन दिन का बहुत सारा टाइम देना होता है। मन लगाकर पढ़ने के लिए 8 घंटे दिए। हर तीसरे दिन लगता है कि अब नहीं हो रहा, लेकिन खुद को खुश रखते हुए अच्छी नींद लेते हुए वापसी करनी होती है। मेरा मोटिवेशन फैक्टर स्कूल टाइम से बनाया गया लक्ष्य था। मेरी सोच हमेशा एकतरफा ही रही। इसलिए 100% स्टडी में ही दिया। महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर काम करने के लिए ही मैंने हरियाणा कैडर को चुना। मैसेज - यह एग्जाम बहुत कठिन है, गिव अप करने की बहुत सी कंडीशन्स आती हैं, लेकिन खुद को मोटिवेट करते रहें कि एक दिन वाला हार्ड वर्क नहीं, कंसिस्टेंट हार्ड वर्क जरूरी है। उम्मीद न छोड़ें, रूटीन बनाएं डिसीप्लिन बनाए रखें। 

हमेशा अपने आप पर भरोसा रखें, 100% दीजिए सफल होंगे। 

2016 टॉपर - नंदिनी केआर

कन्नड़ लिट्रेचर से अटैम्प्ट देने वाली कर्नाटक की नंदिनी केआर ने बताया था कि हार्ड वर्क करें, उन्होंने भी कई असफलताएं देखी, लेकिन कभी उम्मीद नहीं छोड़ी। नंदिनी की बैलेंस लाइफ रही, फैमिली का दबाव नहीं था, जो सोचा वह उन्हें करने दिया। पढ़ाई को हमेशा इंजॉय किया। पढ़ाई के बारे में बताया कि स्टडी टाइम से नहीं क्वालिटी से ही हो पाती है। नंदिनी ने अपनी कमियों का चार्ट बनाया, उसे इम्प्रूव किया। राइटिंग स्पीड बढ़ाई। थॉट्स की पेपर पर प्रैक्टिस की। पॉजीटिव को अपनी स्ट्रेंथ में कन्वर्ट किया। नंदिनी कहती हैं कि सेल्फ एनालिसिस करना हर असफलता के बाद जरूरी है। इससे बाहर आने का रास्ता खुद खोजना होगा। नंदिनी ने चौथे अटैम्प्ट में टॉपर बनी , दूसरे मे आईआरएस किया, थर्ड क्लीयर नहीं हुआ और फिर 100% दिया जिसका रिजल्ट सामने है। स्ट्रगल जब बहुत हो जाता है तब आखिर में खुशी जरूर मिलती है यही मेरा विश्वास था। खाली समय में नंदिनी ने स्पोर्ट्स में बॉलीवॉल खेला, लिट्रेचर पढ़ना भी फेवरिट शगल रहा। वाइल्ड लाइफ ट्रेकिंग भी ज्यादा पसंद था। 

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टॉप करने वाले स्टूडेंट्स ने बताया कि वे एग्जाम से पहले 8-10 घंटे स्टडी में देते और सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाए रखते थे।

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