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PCM के स्टूडेंट्स इंजीनियरिंग के अलावा यहां बना सकते हैं अपना करियर

इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए आयोजित होने वाली जेईई मेन के लिए आवेदन करने वाले स्टूडेंट्स की संख्या लगातार कम हो रही है। 

एजुकेशन डेस्क, भोपाल। 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स (पीसीएम) सबजेक्ट का चयन करने वाले अधिकांश स्टूडेंट्स इंजीनियरिंग का चयन करते हैं। इसमें एडमिशन जेईई मेन के स्कोर के आधार पर मिलता है जबकि आईआईटी में एडमिशन के लिए जेईई एडवांस्ड का स्कोर जरूरी होता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों के दौरान जॉब की समस्या के चलते अब इंजीनियरिंग से छात्रों का मोह भंग होता जा रहा है। टॉप इंस्टीट्यूट्स से इंजीनियरिंग की डिग्री लेने वाले स्टूडेंट्स ही अच्छी जॉब हासिल करने में सफल होते हैं। ऐसे में जेईई मेन में अच्छी रैंक हासिल न कर पाने वाले स्टूडेंट्स कॅरिअर के अन्य विकल्पों का चयन भी कर सकते हैं। फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स (पीएसएम) विषयों के साथ 12वीं की परीक्षा पास करने वाले अधिकांश स्टूडेंट्स इंजीनियरिंग का विकल्प चुनते हैं। लेकिन इसमें टॉप इंस्टीट्यूट्स से पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स को ही अच्छी जॉब मिलती है। ऐसे में इस स्ट्रीम के स्टूडेंट्स के लिए इंजीनियरिंग के अलावा अन्य कॅरिअर ऑप्शंस के बारे में बता रहे हैं कॅरिअर एक्सपर्ट पंकज कपाड़िया और विकास कुमार। 


परंपरागत स्ट्रीम में ये हो सकते हैं विकल्प 
आर्ट्स स्ट्रीम से संबंधित विषयों का चयन करने वाले स्टूडेंट्स के पास बैंक, रेलवे, मैनेजमेंट, जर्नलिज्म, टीचिंग जैसे विकल्प होते हैं। कॉमर्स से संबंधित स्ट्रीम चुनने वालों के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंसी, कंपनी सेक्रेटरीशिप, कॉस्ट एंड वर्क अकाउंटेंसी, मार्केट एनालिस्ट जैसे कोर्सेस में ज्यादा संभावनाएं होती हैं। इसके अलावा वे मैनेजमेंट, टीचिंग या सरकारी नौकरियों के लिए जनरल कॉम्पिटिशन का विकल्प भी चुन सकते हैं। 

कम हुए जेईई मेन के आवेदक 
इंजीनियरिंग की जॉब में कमी का नतीजा है कि अब इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए आयोजित होने वाली जेईई मेन के लिए आवेदन करने वाले स्टूडेंट्स की संख्या लगातार कम हो रही है। 


जेईई मेन के लिए आवेदन करने वाले स्टूडेंट्स

साल अप्लाय करने वाले स्टूडेंट्स कम हुए (%)

2014

13.56 लाख -

2015

13.04

3.83%

2016

12.07 लाख

7.43% 

2017

11.99 लाख

0.66% 

2018

11.48 लाख

4.25% 


60% स्टूडेंट्स को नहीं मिली जॉब 
ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार देशभर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ने वाले 60% स्टूडेंट्स को कोर्स के बाद जॉब नहीं मिल पाती है। ऐसे इंजीनियरिंग के अलावा अन्य जॉब का विकल्प चुनना पड़ता है। 

अंडरग्रेजुएट स्तर पर ह्यूमैनिटीज चुनने वाले छात्र सबसे ज्यादा 
हालांकि भले ही इतनी बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स द्वारा इंजीनियरिंग का विकल्प चुना जाता है, लेकिन बैचलर स्तर पर ह्यूमैनिटीज चुनने वाले स्टूडेंट्स की संख्या सबसे ज्यादा है। इसके बाद साइंस से बैचलर डिग्री करने वाले स्टूडेंट्स का अनुपात ज्यादा है। 

स्ट्रीम स्टूडेंट्स

ह्यूमैनिटीज

40 फीसदी 

साइंस

16 फीसदी 

इंजी. और टेक्नोलॉजी

15.6 फीसदी 

कॉमर्स

14.1 फीसदी 


इन क्षेत्रों का कर सकते हैं चयन 

  1. - कंप्यूटर साइंस: आईटी सेक्टर, सीएस, सॉफ्टवेयर डेवलपर जैसे विकल्प चुन सकते हैं। प्रोग्रामर, मल्टीमीडिया डिजाइनिंग, नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेशन, टेक्नोलॉजी मैनेजर जैसे विकल्प हैं। 
  2. - पैरा मेडिकल: इसमें फिजियोथैरेपी, स्पीच थैरेपी, ऑडियोलॉजी, नर्सिंग, आर्थोडिस्ट, मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी,न्यूट्रीशियन आदि को चुन सकते हैं। 
  3. - बायोटेक्नोलॉजी: इसमें बायो- साइंस, बॉटनी, जूलॉजिस्ट, बायोलॉजिस्ट, पर्यावरण विज्ञान जैसे विकल्प चुन सकते हैं। 
  4. - फूड टेक्नोलॉजी : खाना-खजाना में शौक रखने वालों के लिए फूड टेक्नोलॉजी का विकल्प भी बेहतर साबित हो सकता है। चाहें तो होम साइंस का विकल्प भी चुन सकते हैं। 
  5.  - डेयरी साइंस : 12वींके बाद स्टूडेंट ऑल इंडिया बेसिस पर एंट्रेंस एग्जाम पास करने के बाद चार वर्षीय स्नातक डेयरी टेक्नोलॉजी के कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। कुछ इंस्टीट्यूट डेयरी टेक्नोलॉजी में दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स भी ऑफर करते हैं। 
  6.  - एनवायरमेंटल साइंस : इकोलॉजी, डिजास्टर मैनेजमेंट, वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट, पॉल्यूशन कंट्रोल पढ़ाए जाते हैं। नौकरी की अच्छी संभावनाएं हैं। 
  7.  - माइक्रो बायोलॉजी: बीएससी इन लाइफ साइंस या बीएससी इन माइक्रो-बायोलॉजी कोर्स कर सकते हैं। 
  8.  - वाटर साइंस : यह जल की सतह से जुड़ा विज्ञान है। इसमें हाइड्रोमिटियोरोलॉजी, हाइड्रो जियोलॉजी, ड्रेनेज बेसिन मैनेजमेंट, वाटर क्वालिटी मैनेजमेंट, हाइड्रोइंफॉर्मेटिक्स जैसे विषयों की पढ़ाई करनी होती है। 
  9.  - बैचलर ऑफ बिजनेस स्टडीज: बीबीएस के अंडरग्रेजुएट मैनेजमेंट प्रोग्राम में दाखिला ले सकते हैं। इसके लिए ऑल इंडिया स्तर पर प्रवेश परीक्षा होती है। इसमें दाखिले के लिए अंग्रेजी और गणित विषय भी अपेक्षित है। 
  10.  - बैचलर ऑफ फाइनेंशियल एंड इंवेस्टमेंट एनालिसिस: बीएफआईए एक स्पेशलाइज्ड कोर्स है। इसमें छात्रों को फाइनेंस के विभिन्न पहलुओं के बारे में बताया जाता है। 
  11.  - बैचलर ऑफ बिजनेस इकोनॉमिक्स: बीबीई बाजार के इस्तेमाल में आने वाले अर्थशास्त्र पर केंद्रित कोर्स है। यह परंपरागत अर्थशास्त्र ऑनर्स से इस मायने में अलग है। 
  12.  - शॉर्टटर्म कोर्स: एनिमेशन, ग्राफिक डिजाइनिंग, एस्ट्रोनॉमी, लिंग्विस्टिक, एविएशन आदि में कॅरियर बना सकते हैं। ये कोर्स आप पढ़ाई या जॉब करते हुए भी कर सकते हैं। 
  13. - फिजिकल साइंस: इसमें आप केमिस्ट, गणितज्ञ, एस्ट्रोनॉमी, फॉरेंसिक साइंस,जियोग्राफर, जियोलॉजिस्ट, ऑपरेशन रिसर्चर, स्टैटिस्टिशियन जैसे विकल्प चुन सकते हैं। 
  14.  - टेक्निकल राइटर: टेक्निकल राइटर बनने के लिए आप पहले बीएससी या बीटेक करें। फिर किसी भी पंजीकृत संस्थान से टेक्निकल राइटिंग का कोर्स कर सकते हैं। 
  15.  - फॉरेस्ट एंड वाइल्ड लाइफ: जंगल और वन्य जीव से स्नेह है तो 12वीं के बाद फॉरेस्ट एंड वाइल्डलाइफ का विकल्प चुनकर वन्य जीव संरक्षण या इससे जुड़े सेक्टरों में रोजगार तलाश सकते हैं। 


 

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