12th के बाद बेस्ट ऑप्शन है 'डिस्टेंस लर्निंग', जानें इससे जुड़ी हर जरूरी बात

डिस्टेंस लर्निंग के बारे में अक्सर हम सब सुनते रहते हैं। कॉम्पिटीशन के जमाने में आज डिस्टेंस लर्निंग बेस्ट ऑप्शन बनकर उभरा है।

एजुकेशन डेस्क। डिस्टेंस लर्निंग के बारे में अक्सर हम सब सुनते रहते हैं। कॉम्पिटीशन के जमाने में आज डिस्टेंस लर्निंग बेस्ट ऑप्शन बनकर उभरा है। अगर कोई जॉब के साथ-साथ पढ़ाई करना चाहता है, तो उसके लिए डिस्टेंस लर्निंग बहुत अच्छा ऑप्शन है। आज के समय में डिस्टेंस लर्निंग एक ताकत बनकर उभरी है, जिसका इस्तेमाल करके हर कोई अपने सपने पूरे कर सकता है। ऐसे में bhaskareducation.com आपको 'डिस्टेंस लर्निंग' से जुड़ी हर वो बात बताने जा रहा है, जिसे जानना आपके लिए बहुत जरूरी है।

डिस्टेंस लर्निंग क्या होती है?

दरअसल, अगर कोई घर बैठकर ही किसी ओपन यूनिवर्सिटी से कोई कोर्स करता है, तो उसे डिस्टेंस लर्निंग या डिस्टेंस एजुकेशन कहा जाता है। डिस्टेंस लर्निंग असल में एक ऐसा सिस्टम है, जिसमें स्टूडेंट्स को कॉलेज या इंस्टीट्यूट में रहने की जरूरत नहीं होती। भारत में कई सारी ऐसी ओपन यूनिवर्सिटीज़ हैं, जो डिस्टेंस लर्निंग के कोर्सेज करवाती हैं। डिस्टेंस लर्निंग की वजह से आज एजुकेशन सेक्टर में बड़ा बदलाव आया है और इसके जरिए कम फीस में अच्छा कोर्स और हायर एजुकेशन किया जा सकता है।

क्यों आज की जरूरत है डिस्टेंस लर्निंग?

अगर देखा जाए तो आज युवा पढ़ाई से ज्यादा जॉब पर फोकस करता है। कॉम्पिटीशन के दौर में कई छोटी-बड़ी कंपनियां भी खुल गई हैं, जो अच्छे-खासे पैकेज में नौकरी पर रख लेती हैं। लिहाजा कई सारे लोग 12वीं के बाद या ग्रेजुएशन के बाद ही जॉब करने लगते हैं, जिससे उनका एजुकेशनल वैल्यू-एडीशन रुक जाता है। जबकि असल में एजुकेशन हम सबके लिए बहुत जरूरी है। कॉरपोरेट सेक्टर कंपनियां परफेक्ट कर्मचारी ही चाहती हैं। यहां न केवल जॉब सिक्योरिटी के लिए बल्कि कंपनी की ग्रोथ के लिए एम्प्लाई की क्वीलिफिकेशन/स्किल्स में वृद्धि जरूरी है। डिस्टेंट लर्निग इस मामले में उपयोगी है।

डिस्टेंस लर्निंग में भी दमदार कोर्सेज़

डिस्टेंस एजुकेशन के क्षेत्र में कई संस्थानों ने अपना स्पेशलाइजेशन किया है। इसमें सबसे जाना पहचाना नाम बन चुका इग्नू आज अपने 77 से ज्यादा एकेडमिक, प्रोफेशनल, वोकेशनल, अवेयरनेस जेनरेटिंग प्रोग्राम्स के जरिए देश के लाखों छात्रों को फायदा पहुंचा रहा है। इस दिशा में अंडरग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट, प्रोफेशनल स्तरों पर कोर्सेज़ की कमी नहीं है। यहां आर्ट्स, कॉमर्स, सांइस स्ट्रीमों में डिग्री या डिप्लोमा कोर्स उपलब्ध हैं। जिनमें फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी, इकोनॉमिक्स, हिस्ट्री, पॉलिटिकल साइंस आदि प्रमुख हैं। प्रोफेशनल कोर्सो में बी-एड, बीबीए, बी-लिब आदि छात्रों की पहली पंसद बनते हैं। तो पीजी कोर्सेज में स्टूडेंट्स का झुकाव ज्यादातर एमए , एमएससी, एमकॉम, एमबीए में देखा गया है।

डिस्टेंस एजुकेशन काउंसिल की स्थापना

डिस्टेंस एजुकेशन की लोकप्रियता के चलते सरकार ने इस कांउसिल की स्थापना 1985 के नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी एक्ट के तहत की। जिसका काम देश भर की ओपन यूनिविर्सिटी के साथ समन्वय करना होता है। इसके अलावा यह कोर्सेज़ की गुणवत्ता, उनकी सभी तक पहुंच, पाठ्यक्रम निर्माण में गहन वैज्ञानिक सोच, नई तकनीकों का प्रसार, अध्यापक ट्रेनिंग, फंड एलोकेशन जैसे कामों को भी सुनिश्चित करती है। डिस्टेंस एजुकेशन को यूनिवर्सिटी एक्ट की धारा 16 में जगह दी गई है।

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ डिस्टेंस स्टडीज

सरकार ने जयपुर में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ डिस्टेंस स्टडीज की स्थापना की थी। जिसका मकसद डिस्टेंस लर्निंग के माध्यम से देश के बढते पूंजी बाजार को क्षमतावान नेतृत्व देना है। इस काम में आईआईडीएस को एजुकेशन डेवलेपमेंट एंड मैनेजेरियल रिसर्च ट्रस्ट (इडीएमआर) सहयोग करता है। आईटी, एचआर, प्रोडक्शन,फायनेंस इसके मुख्य क्षेत्र हैं।

डिस्टेंस लर्निंग से क्या होते हैं फायदे?

1. एक अनुमान के मुताबिक इनमें शामिल कुल छात्रों में औसतन 60 से 65 फीसदी छात्र नौकरी पेशे से जुडे होते हैं। जिनके लिए अपने बिजी शिड्यूल में रेगुलर कोर्सेज के लिए वक्त निकालना मुश्किल होता है। डिस्टेंस कोर्सेज़ की मदद से अपनी क्वालीफिकेशन को बढ़ाकर तरक्की का सपना जरूर पूरा कर सकते हैं।

2. अब तक माना जाता था कि रीति-रिवाजों, रूढियों व पूर्वाग्रहों से भरे भारत में महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा की राह तय करना आसान नहीं होता। पर बाकी बहुत सी चीजों की तरह यहां भी बदलाव आ रहा है और इन बदलावों में डिस्टेंस लर्निग की उल्लेखनीय भूमिका है।

3. शिक्षा क्षेत्र में उम्रदराज लोगों की मौजूदगी यह बताने को काफी है कि लोग बढती उम्र में भी पढाई/डिग्रियों का रुझान रखते हैं। वैसे भी जिस तरह आज ओपन इकोनॉमी के दौर में रिटायरमेंट के बाद भी कंपनियां अपने ही कर्मचारियों या दूसरे अनुभवी कर्मचारियों को जगह दे रही हैं, लिहाजा उनका हाइली क्वालीफाइड रिज्यूम रिटायरमेंट के बाद भी उनके लिए स्कोप जीवित रखता है।

4. शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए डिस्टेंस लर्निंग संभावनाओं का एक स्त्रोत है। डिस्टेंस लर्निग इन्हें बगैर कहीं आये जाये घर बैठे डिग्री व डिप्लेामा पाने का अवसर देता है।

5. इसके अलावा यह औसत प्रतिभा वाले उन छात्रों के लिए भी बड़ा सहारा है जो सीमित सीटों के चलते अक्सर प्रोफेशनल कॉलेजों में एडमिशन की दौड़ में पीछे रह जाते हैं।

कौन-कौन से हैं इंस्टीट्यूट?

- इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी

- डॉ. भीमराव अंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी, हैदराबाद

- मदुरै कामराज यूनिवर्सिटी, मदुरै

- दिल्ली यूनिवर्सिटी

- मद्रास यूनिवर्सिटी

- सिंबोसिस, पुणे

- एसएनडीटी यूनिवर्सिटी

- सिक्किम मनिपाल यूनिवर्सिटी

- नालंदा ओपेन यूनिवर्सिटी

- कर्नाटक ओपन यूनिवर्सिटी

- महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी, कोटट्म, केरल

- आईसीएफएआई यूनिवर्सिटी

- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉमर्स एंड ट्रेड

- उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद

- अन्नामलाई यूनिवर्सिटी, तमिलनाडु

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डिस्टेंस लर्निंग के लिए इग्नू देश की सबसे अच्छी यूनिवर्सिटी में से एक है।

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