चाइल्ड सिक्योरिटी के लिए 164 पॉइंट्स का सेफ्टी मैन्युअल, गाइडलाइंस जारी

नई गाइडलाइंस के मुताबिक स्कूलों को 3 से 6 साल के बच्चों के लिए अलग टॉयलेट और अटेंडेंट का इंतजाम करना होगा।

एजुकेशन डेस्क, रांची। चिप्स, समोसे, कचौड़ी, कोल्ड ड्रिंक, नूडल्स, पिज्जा, बर्गर, पोटेटो फ्राइज के अलावा हलवाई की दुकान पर बनने वाले सभी आइटम्स अब स्कूलों की कैंटीन से तो दूर होंगे ही, ऐसे फूड आइटम्स को स्कूल के 50 मीटर के दायरे में भी नजर आने की परमिशन नहीं होगी। हाल में नेशनल काउंसिल फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स 'एनसीपीसीआर' ने बच्चों की ओवरऑल सिक्योरिटी एंड सेफ्टी को लेकर एक 'सेफ्टी मैन्युअल' जारी किया है। 

पैरैंट्स कर सकते हैं शिकायत

- 164 प्वाइंट्स के इस सेफ्टी मैन्युअल में एनसीपीसीआर ने बच्चों की स्कूल कैंपस में सिक्योरिटी, कैंटीन की हाइजीन, स्कूल की साफ-सफाई, बच्चों के साथ स्कूल में किए जाने वाले व्यवहार और स्कूल बस में सिक्योरिटी से जुड़े निर्देश दिए हैं।
- इसे विशेष तौर पर पैरेंट्स की चिंता को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसके जरिए पैरेंट्स क्रॉस-चेक कर सकते हैं कि निर्देश के मुताबिक उनके बच्चे के स्कूल में सेफ्टी नॉर्म्स का कितना ख्याल रखा जा रहा है।
- ऐसा न होने पर पैरेंट्स जिला प्रशासन या मानव संसाधन मंत्रालय के पास शिकायत भी कर सकते हैं। आप http://ncpcr.gov.in पर पूरा मैनुअल देख सकते हैं। 

 

                                        स्कूल नोटिस बोर्ड पर लगाएं- बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या किया 

            कैंटीन को लेकर गाइडलाइन

                     साइको-सोशल गाइडलाइन 

  • - हाई इन फैट, शुगर एंड सॉल्ट फूड आइटम्स को स्कूल के 50 मीटर के दायरे तक उपलब्धता पर रोक।
  • - कैंटीन पॉलिसी होनी चाहिए, बच्चों को न्यूट्रीशियन और हेल्दी फूड देने को लेकर मानक तय हों।
  • - पेस्ट कंट्रोल व हाइजीन को लेकर ध्यान रखना है। 
  • - हर स्कूल को अपने सेफ्टी मेजर्स को स्कूल के नोटिस बोर्ड पर लगाना है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए उसने किस तरह के कदम उठाए हैं।
  • - स्कूल को एंटी-बुलिंग कमेटी तैयार करनी है, जो कि यह ध्यान रखे कि ग्रुप बुलिंग में कोई भी शामिल न हो। 

 

ये हैं चाइल्ड सेफ्टी चेकलिस्ट के कुछ प्वाइंट्स 

- सीसीटीवी मॉनीटरिंग सिस्टम रेगुलर वर्क कर रहा है या नहीं। 
- लड़के-लड़कियों के लिए अलग टॉयलेट्स हों। 
- डिसएबल्ड बच्चों के लिए अलग से टॉयलेट हो। 
- 3 से 6 साल के बच्चों के लिए अलग टॉयलेट और अटेंडेंट होने चाहिए। 
- वेस्ट मटीरियल डिस्पोजल डस्टबिन टॉयलेट में जरूर हो। विशेष रूप से गर्ल्स टॉयलेट में। 
- स्कूल में फर्स्ट एड किट की पूरी व्यवस्था हो। 
- स्कूल की बसों में टीचर्स को बच्चों को सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है या नहीं। 
- स्कूल बस स्टाफ का पुलिस वेरिफिकेशन हो 
- नर्सरी और एलिमेंट्री स्कूल हमेशा ग्राउंड फ्लोर पर ही होने चाहिए। 
- प्रति 100 बच्चों पर 20 वर्गी मीटर का फ्लोर स्पेस होना चाहिए कैंटीन के लिए। अतिरिक्त 100-100 बच्चों पर 4 वर्ग मीटर का स्पेस बढ़ेगा। 
- स्कूलों को फायर सेफ्टी का सर्टिफिकेट मिला होना चाहिए। इसे सही समय अंतराल पर स्थानीय प्रशासन द्वारा जांच कर सत्यापित किया जाना है। 
- बस पर स्कूल प्रबंधन का फोन नंबर जरूर लिखा हो। 
- क्लास और कैंपस से बाहर निकलने के लिए ज्यादा दरवाजे होने चाहिए। 
- स्कूल बस में अलार्म या सायरन होना चाहिए जो इमरजेंसी में बजे। 
 


वहीं, राजस्थान में भी कोर्ट ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था करने के आदेश

- कोर्ट ने स्कूलों में छोटे बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था करने के आदेश दिए हैं। साथ ही आदेश दिया कि जो वाहन प्रयोग में लिए जाते हैं उनका और चालकों के अनुज्ञा-पत्रों का वेरिफिकेशन करवाया जाए। इससे छोटे बच्चों की समुचित सुरक्षा हो सके।
- यह आदेश स्थाई लोक अदालत ने दिए। वकील वीरेंद्र कुमार सक्सेना, राजेंद्र मालवीय, केसरी लाल बैरवा, इलियास गौरी, हितेश जैन और दीपक माहेश्वरी ने पिछले साल स्थाई लोक अदालत में याचिका दाखिल की थी। इसमें जिला कलेक्टर माध्यमिक और प्रारंभिक जिला शिक्षा अधिकारी को पार्टी बनाया था। 

स्कूलों के बाहर सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था हो 

- वकीलों ने तर्क दिया कि रेयाना स्कूल की घटना के बाद यह आवश्यक हो गया कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए समुचित व्यवस्था की जाए। यहां तक कि वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस का भी वेरिफिकेशन करवाया जाए।
- साथ ही स्कूलों के बाहर गार्ड लगाने और सीसीटीवी कैमरे लगाएं जाएं, जिससे घटना के बारे में सही पता चल सके। इधर, अप्रार्थी का तर्क रहा कि राज्य सरकार के उपलब्ध संसाधनों के आधार पर ही सुरक्षा व्यवस्थाएं की जाती है।
- निजी स्कूल अपने स्तर पर कार्य करता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि बच्चों की समुचित सुरक्षा होनी चाहिए। इस बात से प्रशासन सहमत है। 

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