UPSC 2017: वीमन एम्पाॅवरमेंट के लिए काम करने आईपीएस चुनेंगे 13th रैंक होल्डर सागर कुमार

झारखंड से सागर कुमार के अलावा 6 और कैंडिडेट्स यूपीएससी 2017 की फाइनल रैंकिंग में अपनी जगह बनाने में सफल हुए हैं।

रांची।  यूपीएसी 2017 एग्जाम में झारखंड के कैंडिडेट्स ने बाजी मारी। रांची के डोरंडा के सागर कुमार को ऑल इंडिया लेवल पर 13th रैंक मिली। सागर को यह सक्सेस उनके थर्ड अटैम्प्ट में हासिल हुई। दैनिक भास्कर से बातचीत में सागर ने बताया कि उनकी इस सफलता में पैरेंट्स के अलावा बहनोई रविश रंजन का सपोर्ट मिला। पिता मिहिर कुमार झा पाकुड़ में प्रखंड सहकारिता प्रसार पदाधिकारी हैं। उनके जीजा समस्तीपुर के डीएमई हैं। फूफा भागेश्वर झा (रिटायर्ड डीआईजी) इनके प्रेरणा स्रोत रहे हैं।

हर लेवल पर किया टॉप 

सागर ने डीपीएस रांची से स्कूलिंग की। साइंस स्ट्रीम के स्टूडेंट सागर ने 2015 में बीएचयू से कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में टॉप किया। बेंगलुरू में सैमसंग कंपनी में अच्छा सैलरी पैकेज होने के बाद 5 माह में ही नौकरी छोड़ दी। और फिर यूपीएससी की तैयारी में लग गए। सागर ने बताया कि 2016 में वह असिस्टेंट कमांडेंट की परीक्षा में देशभर फर्स्ट रैंक पर रहे।

पुलिस सेवा में जाना चाहता हूं : सागर

यूपीएससी की परीक्षा में रांची के डोरंडा के सागर कुमार के इस परीक्षा में 13th रैंक मिला है। सागर पुलिस सेवा में जाना चाहते है। इसके लिए उन्होंने मन बना लिया है। सागर कहते है कि पुलिस सेवा में जाकर देश की सेवा करेंगे। इसके साथ ही नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र में काम करना चाहते है। देश में इन दिनों नारी अत्याचार की घटनाओं ने सागर को पुलिस सेवा के लिए प्रेरित किया है। वे नारियों को न्याय दिलाना चाहते हैं।

और भी झारखंड के होनहार

इसके अलावा रांची के ही मनीष मयंक को 214th व श्रेय वत्स को 343th रैंक मिली है। बोकारो की कुमारी सुनीता को यूपीएससी एग्जाम में 269th रैंक मिली है। जमशेदपुर के रतन कुमार झा ने भी तीसरे प्रयास में सफलता पाई है। मूलत: मधुबनी के महराइन के रहने वाले रतन को इस परीक्षा में 408th रैंक मिली है। जबकि धनबाद के ऋषिराज को 27th और बेरमो निवासी अभिलाष बर्णवाल को 44th रैंक हासिल हुआ है।

मयंक पहले प्रयास में सफल

रांची के ही मयंक मनीष को पहले प्रयास में ही यूपीएससी में ओबीसी कोटा में 214th रैंक मिली है। डीएवी हेहल से 12th के बाद एनसीआरए में सफलता मिली, लेकिन उसमें नहीं गए। आईआईटी में सफल हुए और खड़गपुर में 2012 में एडमिशन लिया। बीई कंप्यूटर साइंस के बाद 2017 में तैयारी करते हुए पहली बार यूपीएससी एग्जाम दिया। स्कूल में पढ़ाई के दौरान एनटीएसई में सफल हुए थे। स्कूल स्तर पर कई अवार्ड जीते। उनके पिता महेंद्र प्रसाद गुप्ता रोड डिवीजन में असिस्टेंट इंजीनियर है। मां रेणु प्रसाद होम मेकर हैं। 

सुनीता दोबारा देंगी परीक्षा 

बोकारो की सुनीता ने 269th रैंक पाई है। 3 साल नौकरी करने के बाद अच्छा पैकेज छोड़ दिया। दिल्ली जाकर यूपीएससी की तैयारी की। दूसरी बार में सफल हुईं। लेकिन संतुष्ट नहीं हैं। 30 दिन बाद बेहतर रैंक के लिए फिर यूपीएससी प्री एग्जाम देंगी। 

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